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सांवर सुरतिया पर राघव

 सांवर सुरतिया पर राघव, अंखिया दीवाना हो गइल। अंखिया दीवाना हो गइल। हो सांवर, सुरतिया पर राघव, हमार अंखिया दीवाना हो गइल।।1।। एक तऽ तहरो बड़ी बड़ी नैना, दोसरे एमें काजर लगावल। तीसरे हई हंसी-हंसी नैना मिलावल, हो सांवर, सुरतिया पर राघव, हमार अंखिया दीवाना हो गइल।।2।। एक तऽ तहरो अधर पातर, दोसर एमें लाली लगावल। तीसरे हई मंद-मंद मुस्की मारल, हो सांवर, सुरतिया पर राघव, हमार अंखिया दीवाना हो गइल ॥3।। एक तऽ तहरो हाथ बा कोमल, दोसरे में बाजुबंद बा बान्हल। तीसरे हई शिव धनुही उठावल, हो सांवर, सुरतिया पर राघव, हमार अंखिया दीवाना हो गइल॥4।। एक तऽ तहरो पंउंवा सुकुवार, दोसरे में धूरा लपिटाइल। तीसरे हई अहिल्या के तारल, हो सांवर, सुरतिया पर राघव, हमार अंखिया दीवाना हो गइल॥5।। एक तऽ तहरो भोग छप्पन, दोसरे में माखन रोटी धइल। तीसरे हई प्रेम में जूठ बइर खाइल, हो सांवर, सुरतिया पर राघव, हमार अंखिया दीवाना हो गइल ॥6।। एक तऽ तहरा संगे सीता, दोसरे में लछुमन खाड़। तीसरे हई हनुमत जिया में बसल, हो सांवर, सुरतिया पर राघव, हमार अंखिया दीवाना हो गइल॥7।। एक तऽ तूं जगतपति हउवऽ, दोसरे में करुनानिधान हमरो। तीसरे हई जग...

हर धड़कन पर नाम लिखनी

  अपना हर धड़कन पर नाम उनकर लिख लिहनी;  अइसन करत ना जननी कि हम कुछ गलत कइनी;  ऊ साथ निभावे के वादा कऽ के हमसे बदल गइले;  बेवफाई से ऊ अपना, हमरा के कुछ सबक दे गइले; साँझ सवेरे रोज जेकरा नामे हम आपन करत रहनी; ऊ आज केहू आउर के संगे बाँचत बाड़े प्रेम कहानी; उनकरा इयाद में अँखिया आजो रहता हमार भींजल: रह-रह लउकता उनकर ऊ मने-मने हमरा पर हँसल; कहाँ गइल ऊ बंद मुँह से अँखिया से सभ बात कहल; काहे मेंटल ऊ प्यार जवन हमनी में भइल कबो रहल; आदत तहार बा रिश्ता बना के नाता सभका से तुड़ल; आदत हमार बा नाता नेह के अपना दुश्मनो से जोड़ल; रहिया आजो निहारता अँखिया उनकरा लवटि आवे के; बाकी इरादा बुझाता उनकर अबहीं हमरा के तड़पावे के। राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"

सोंच सकऽ त सोंचऽ

* सोंच सकऽ त सोंचऽ * ऐ भाई सोंच सकऽ त सोंचऽ कंहवा बा सिस्टम में लोज जे रहे दउर में दउड़त फर्राटा काहे ओकरा गोड़ में बा मोच सोंच सकऽ त सोंचऽ।।1।। हाथ पसार रोजी रोटी जनता मांगे कर जोड़ नेता मांगस खाली वोट काम ना कवनो अफसर करस बिना लिहले कड़क गुलाबी नोट देखऽ कइसन भइल सभकर सोंच सोंच सकऽ त सोंचऽ।।2।। नवकन के देश में बा ना कवनो खोज नोकरी मंगला पर गोजी मिले रोज माई कहस हमरो बबुआ बने अफसर बाबूजी कहस इनके मनमौजी अक्सर एही में पिसाता नवहन के भविष्य रोज सोंच सकऽ त सोंचऽ।।3।। सभ जगहा हड़ताल आ प्रदुषण आपने आज बनल बा दुशासन सीमा पर बरिसे गोली रोजे रोज वीरन के बहादुरी के घरवा में होखेला अब चिल्ला के खोजी रोज सोंच सकऽ त सोंचऽ।।4।। दुश्मन जे ललकारे कऽ के विस्फोट घर में घुस के मारीं कसके लंगोट तबो ऊ घातकी बन भेड़िया बा ताक में बइठल लेके कवनो ओट मौका मिलते लीही ऊ मुंहवा नोंच सोंच सकऽ त सोंचऽ।।5।। घटल बा उत्पादन क्षमता रुकल बा धन के रस्ता अमरीकी डॉलर के सोझा गिरल बा अब आपन नोट सभका कपारे पड़ल बा मंहगाई डाइन के चोट खर्ची घर के चली कइसे इहे रहल बा सभे सोंच सोंच सकऽ त स...

कहंवा गइलु महतारी

लड़ते लड़त महामारी से कंहवां चल गइलु महतारी कहऽ अब नन्हकी के, के सम्हारी का कहाई ओकरा से रोई रोई जब ऊ माई-माई पुकारी थाकी अंखियां ओकर रहिया निहारी बाबू बाबू कही के, अब के पुचकारी जेठ के दुपहरिया में मंथवा पर बाबू के, के आपन अंचरा डारी हो रोज सबेरे बबुआ के इस्कूलिया  के अब भेजी बरियारी लड़ते लड़त महामारी से कंहवां चल गइलु महतारी रहे सभे घरवा के भीतर कहे मोदी सभके पुकारी तबो कुछ लोगवा काहे करे बरियारी फइलावे के कोरोनवा रहे ऊ तइयारी रोई रोई करजोड़ी कहे ठेठबिहारी, रउआ अबहूं से अपना के सम्हारीं चेतीं अबहीं से रउआ करेले निहोरा बेरी बेरी जग से एगो गइल बिया महतारी कि अब ना उजड़ो कवनो अउरी फुलवारी

आवऽ इंसान बनल जाओ

*एगो प्रयास कइले बानी, शायद रउआ सभे के पसन पड़ी। धर्म सूचक शब्दन के प्रयोग केवल भावना संप्रेषण खातिर बा केहू के भावना के ठेस पहुंचावे खातिर ना।* हम हिन्दू हईं, आ तूं मुसलमान बाकिर हईं हमनी पहिले इंसान हमरा हिन्दू भइला पर बा गुमान तोहरा बा गुमान बन मुसलमान आज तोहार खुदा तहरा से नाराज़ बाड़े हमरो भगवान हमरा से नाराज़ कबो कइले होखबऽ गुनाह तुंहु कबो कइले पाप होखेब हमहूं इंसान हो इंसानियत के भूले के खता मालिक दे रहल बाड़े हमनी के सजा ना मंदिर में बोला रहल बाड़े भगवान ना मस्जिद से आवता खुदा के अजान खता हमरो त ओतने ही होई गलती तहरो त ओतने ही होई इंसान हईं त इंसान बनल जाए इंसानियत के धर्म के अपनावल जाए बिगड़ रहल बा जवन सदभाव आवऽ समय रहते संभालल जाव हम चाहे ईश्वर कहीं तूं चाहे अल्लाह कहऽ रूप आ नांव बा अनेक हकीकत में बाड़े ऊ एक छोड़कर हिन्दू मुसलमान मिलकर चल आवऽ हमनी बनीं एक आ बनीं नेक बनी सभे भारतीय प्रत्येक अब हम अपना भगवान के मनाईं तूं अपना खुदा के गोहरावऽ भाई एह विपत से अब दीं उबार हे ईश्वर-अल्लाह करीं हमनी पुकार दीं मौका हमरा के एक बार बनीं इ...

हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं

हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं आवऽ एगो बात बताईं गाथा तोहके आपन सुनाईं दुल्हीन के हाथ के चूड़ी हईं कोहबर के दलही पूड़ी हईं मिश्री से मीठ मिठाई हईं मीठा के बनल लकठो हम सुरुका चिउरा आ चिउरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं अहिल्या के तारण हईं राजेन्द्र के सारण हईं जेपी के आंदोलन हईं गांधी के चम्पारण हम राजनीति के धूरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं कुंवर सिंह के हूंकार हईं ! मंगल पांडे के यलगार हईं अब्दुल हमीद के कुर्बानी हईं हरदम उफनत जवानी हम देशप्रेम से परिपूरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं अंजन-प्रदीप के गीत हईं चित्रगुप्त के संगीत हईं बिस्मिल्लाह के तान हईं महेंद्र के पूर्वी गान हम रंगमंच के भिखारी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं बनारस के घाट हईं सोनपुर के हाट हईं गंगा-सरयू के पाट हईं राष्ट्र के उन्नत ललाट हम मस्त ठाट फकीरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं सोहर झूमर खेलवना हईं बोली भाखा के गहना हईं होरी चइता आ कजरी हम आरा छपरा मिर्जापुरी हईं ठेठबिहारी के माई भोजपुरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी" ग्राम पोस्ट: भटकेसरी जिला: छपरा

साकी

आपन जुठ जे कभी हमके पिया देलs, लबे -साग़र, ‘लबे -साक़ी’ के मजा देला। तहरा मस्ती के हाल अजब देखले बानी, शराब पिये से पहिले सुरुर होखेला। धोखा से पिया देले रहीं, एहू के दू घूँट, पहिले से नरम बा, वायज़ के ज़बाँ अब। करवट लेवेे ला फूलन में शराब, हमसे एह फ़स्ल में तौबा होखी? साक़ी,हेने त देखs हमहूं देर मस्त बानी, कुछ निगह-ए-मस्ती भी मिला दs शराब में । पियत जाईं हम जाम पर जाम भी, लेत जाईं साक़ी तहार नाम भी। जे छीन के पी सकता, पी लेता अब त, मैखाना में ए भाई, नया रीत चलल बा। पिये वाला के नाम भी ना बांचल मैखाना बा उदास, कि साक़ी ना रहल । ई असर उनका पर भइल, सोहबते- मस्ताना के, निहुर के मुँह चूम लिहलख शीशा पैमाना के। बेखुदी में एगो मयकश, कह गइल राज़े–दिल, आज तक ऐ दोस्त, सारा मयकदा बदनाम बा। दिल मिलल शीशा से, आँख लड़ल पैमाना से, हम कहाँ जाएब साक़ी,तहरा मैखाना से। पिया दs अंजुरी से साक़ी, जे हमरा से नफ़रत बा, प्याला ना देबs, मत दs, शराब त दs। हिया के आग बुताये, जेसे, जल्दी उ पानी लेआवs, लगा के बर्फ़ में साक़ी, सुराहिये-मय’ लेआवs।

बस अतना कs दs ए जिनगी

बस अतना कs दs ए जिनगी हरदम हंसत मुसकात रहे, दुखवा के कवनो ना बात रहे, खुशहाली के हरमेशा मिलत सौगात रहे, चिंता-फिक़िर से ना कवनो मुलाकात रहे, ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। जबो केहु से मिले त हंसत-हंसावत रहे, हंसत खेलत हरदम इ गात रहे, चाह के भी ना केहु बिलगा सके, अइसन कुछ नात रहे, ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। चाहे हो फज़िरे चाहे रात रहे, सुतलो जगले हरमेशा जिंदा जज्बात रहे, हरदम हमरो माईभाखा अहवात रहे, लिखी के कहस ठेठबिहारी जवन उनकी मनके बात रहे ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। -----राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"

नैना से नैना मिलाके

नैना से नैना मिलाके कहां जातारु गोरी? हमके दिवाना बनाके काहे छोड़लु हमके गोरी? आपन पागल बनाके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।1। संगे जिए-मरे के खाके किरिया काहे फेर फेरेलु नज़रिया हो कि कहs कवन भइल हमसे खसुर करी दिहलु तुं हमके अपना से दूर काहे कहेलु तुं जियs अब हमके बिसराके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।2। जब-जब बाजे तहरो पायल मनवा होला हमरो घायल जब खन-खन खनकेला कंगनवा तब धक-धक धड़केला मनवा मिलबु ना जे तुं हमकेsssss तs सांच कहिले गोरी मर जाएब हम माहुर खाके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।3। कवन कमी रहे ठेठबिहारी में साथ न छोड़बु कहियो कहले रहलु भरके हमके अंकवारि में तब काहे छोड़ेलु हमके जान मझधारी में अरे हम त लागल रहनी अपना मिलन के तइयारी में होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।4।

चिरई

              *चिरई*       कतना मीठ बा बोली तोर       कतना मीठ तुं गावेलु?       संउसे अकास में पांख पसार       कतना निमन तुं उड़ेलु? लहर जस लहरा चिरई, अंगनइया में घूरमऽ चिरई। फुदुक-फुदुक कोठा पर उतरी, फुर्र-फुर्र उड़ जा चिरई।।          गाछी पर के पाकल फलन के,      नेवान   के   उ    उछाह,     चिखला पर कतना मिलेला     मन  के उ उत्साह? ऐकर भेद बतावऽ चिरई, झूमि-झूमि गावऽ चिरई। जे आ न सकऽ लगे हमरा, हमके लगे बोलावऽ चिरई।।     नन्ही चुकी घोंसला तोर     दूबर-पातर बा चोंच।     ते पर अतना निफिकिर     हई मस्ती नि:संकोच!! फकीरी ठाट चिरई, कुदल-फानल ए चिरई। कहऽ कहां सिखलु तुं झूमि-झूमि गावल ए चिरई।। राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"

ना हऽ इ प्रधानी के चुनाव

ना हऽ ई गंउवा के प्रधानी के चुनाव ए बाबा झूंठऊ के तुं हमनी के भरमावऽ मत ए बाबा बहतर हजार के सपना कतहीं आउर तुं देखावऽ ए बाबा छंहतर सब तहार जानी ला, झुनझुना आपन तुं कतहीं आउर बजावऽ ए बाबा ना हऽ ई गंउवा के प्रधानी के चुनाव ए बाबा।। बनीं हम अफसर चाहे चकुदार ए बाबा ना बनेब कबो देसवा के गद्दार ए बाबा मेहनत मजुरी ईमानदारी में बा नांव ए बाबा ना हऽ ई गंउवा के प्रधानी के चुनाव ए बाबा साड़ी कंबल आ पउवा पर ना वोट बिकाव ए बाबा हक इ हमार केहू से ना छिनाव ए बाबा अबकी होई अइसन उपाय ए बाबा रखबऽ इयाद तु पूर्वांचल के नांव ए बाबा ना हऽ ई गंउवा के प्रधानी के चुनाव ए बाबा

रात कईसे कटल नइखे कुछऊ पता

रात कईसे कटल नइखे कुछऊ पता पियनी अँखिया से केतना पता ना चलल भोरे पसरल किरिनिया कपारे चढ़ल केतना मस्ती भइल बा पता ना चलल। । के सम्हारी समझ के परे जिन्दगी केहू हँथवा पकड़ ले करीं बंदगी रात नैना से केतना बहल नीर बा मन दहाईल बा कहँवा पता ना चलल।। तोहार पैमाना का बा दिल तूरे खातिर काहें भइलु तू निरमोही जुलुमी शातिर आँख से आँख जबसे मिलल बा प्रिये खुद हेरा गइनी कब से पता ना चलल। । ठेठ हमरा के लोगवा बिहारी कहे हमरा दिलवा के कोना भोजपुरी रहे माई तोहरे चरनिया में चहकत बढ़ल कब दो हो गइनी ओजगर पता ना चलल रामप्रकाश तिवारी

कइसे मनाईं हम त्योहार राखी के,

कइसे मनाईं हम त्योहार राखी के, लउकत नइखी कोंख में पुतरी आँखि के । कइसे बुझाई हमरा प्यार राखी के, रहत नइखे बहिनिया सोझा आंखि के।। लूटता इज्जत दुशमनवा दुःशासन टुकुर टुकुर ताकता पबलिक प्रशासन जननी हीं जननी के दरद ना जानस करेली बनके मलकिनी सिरशासन पीट पीट छाती रोवे रोज बाबु माई लोगवा बनल बाटे बड़हन कसाई गली गली घूमेला भेड़िया भयंकर कहाँ से बोलाई अब किसन कन्हाई बाबा चाचा बाप भाई रूप धइलस पपीया शूल बा करेजवा में फाटतारे छतिया केकरा से बहिनी के इजति बचाईं बाटे दरवान बाकी करता ऊ घतिया माई बहिनी बेटी के लोग गरियावता बेटा आ बेटी से कोंख फरियावता मिली ना बहुरिया जब बेटी बिलखिहें अपने जिनिगिया लो अगिया लगावता होखे चाहीं सगरी बेटी के सम्मान   तबे बनी देशवा आपन महान बेटा आ बेटी में फरक नइखे कवनो दुनो के मानल जाय एके समान 

चढ़ते सावन बरसे बदरवा

चढ़ते सावन बरसे बदरवा , प्यास बुतावे धरती के बाकि तरसे मोर करेजवा , याद दिलावे परती के उमड़-घुमड़ के बरसे बदरी , आँखिन गंगा-जमुना धार ए साजन तू सोझा नइखऽ , बोलऽ कइसे करीं सिंगार घोर अन्हरिया बिजुरी चमके , दिल में धड़का लागेला बिना कराही चढ़ले तन में , बालम तड़का लागेला हरियर साड़ी हरियर चूड़ी , बाकी मन हरियर ना भइल आवे के कहलऽ होली में , बाकी इहाँ सवनवो गइल एगो बात बतलाव बालम , का कवनो से बाटे लाग इहँवा गीत बिरह के गाईं , उहँवा तू मनफटुआ राग साँच बात हम कहीं सवनवा , सावन लागे बहुत सुहावन चारो ओर हरियाली छवलस , रंग बा धरती के मनभावन चाह पकउड़ी बइठल खइबऽ , मुसहरी बजार के पेड़ा आवते तोहरा लागे लागी , फफसल फसल में रेंड़ा शहर में कादो दूध ना मिले , अनघा मिलल रहेला पानी इहँवा लगहर तीन मथुरही , हीक भर पियल करीह जानी मिली सजावल छलिहर दही , कहबऽ तऽ छेना फारब तेल फुलेल लगाय रतिया में , खरकटल रूपवा सँवारब दिल्ली में दिलदार बनेलऽ , बुद्धि के बाटे बलिहारी हमरा चाहीं मटिगर मरदा , होखे ऊ ठेठ बिहारी

कईनी कवन कसुर

कइनी कवन कसूरवा ए बाबा , मिलली कलही घरनी । हरदम नाच नचावे ए बाबा जइसे चक्कर घिरनी ।। संग सेजरिया सुते के बेरिया सखियन से बतियावेले । देखा देखा के अँखिया हमके तन में आग लगावेले । बोलेले खरुआ के ए बाबा जइसे खोदल बिर्हनी ।। फेरा के फेर में पड़के फफकीं फूटल करम हमार हो छने छने घोंघियाले घर में सभके बथेला कपार हो देके दहेजवा दगलस ए बाबा बाउर ओकर करनी ससुरारी में ससूरजी के देखनी हम दुरगतिया ससुई हमरो जिनिगी में दिहलसि बड़का भारी बिपतिया चउका बरतन पोछा ए बाबा घरवा के होखे बहरनी माई से गुन सिखले बिया सभके फोरी महमंड हो नइहर के ऊ हीयऽ दुलारी पइसा के बाटे घमंड हो फुफुती उठाके गरजे ए बाबा जइसे गरजे शेरनी तऽ रोई रोई कहसऽ ठेठबिहारी  करवा ई दुनु जोरी कइनी कवन कसूरवा ए बाबा  मिलली कलही घरनी।।

बड़ा अजब हs जिनगी

बड़ा अजब ह s जिनगी ना पता चले एकर खेला कबो हंसावेला कबो रोवावेला पल में साटेला जिनगी पल में बिलगावेला  बड़ा अजब ह s  जिनगी बाकिर......तबो एगो पूजा ह s जिनगी एगो इबादत ह s जिनगी प्रभु के परसादी ह s जिनगी खुदा के बंदगी ह s जिनगी सांचो बड़ा अजब ह s जिनगी कबो जान के रखवइया देला जिनगी कबो जान के लेवइया देला जिनगी दसगो हित देला जिनगी त दुश्मनो हजार देला जिनगी सांचो बड़ा अजब ह s जिनगी कहीं मान देला जिनगी कहीं जान देला जिनगी कहीं नाम देला जिनगी कहीं बदनाम होला जिनगी सांचो बड़ा अजब ह s जिनगी करम में सउनाइल ह s जिनगी कुकर्म में अझुराइल ह s जिनगी ठेठबिहारी के ना बुझाइल उ बुझौवल ह जिनगी सांचो बड़ा अजब ह s जिनगी
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ई चुनावी साल बा

का जाने काहे बदलल चाल बा का हो, का ई चुनावी साल बा? राम भी उनकरा चांहि रहमान भी उनकरा चांहि चुनाव के कइसन इ कमाल बा अबकी बदलल उनकर चाल बा मंदिर मस्जिद दउरत हाल बेहाल बा का हो, का ई चुनावी साल बा? जनता के जियल मुहाल बा नेता भईल मालामाल बा युवा बेरोजगार त किसान कंगाल बा बाकि नेताजी के ना कवनो मलाल बा का हो, का ई चुनावी साल बा? कहे नेता मन में अपना जनता देखऽ मत तुं सपना अबहीं दिनवा तोहार बा इलेक्शन बाद हमरो पांच साल बा तबो देखऽ छले खातिर झोरी पसार बनल ई कंगाल बा का हो, का ई चुनावी साल बा? हर बेर चुनाव से पहिले बतावल बा तबो सभकर ऊहे हाल बा का तुंहुं झूठे अनका के दुसेलऽ ठेठबिहारी जब सभ कइल तहरे कमाल बा का हो,का ई चुनावी साल बा? -राम प्रकाश तिवारी'ठेठबिहारी'

अब कविता ना काथा लिखाई

*अब कविता ना काथा लिखाई* सेजिया के बतिया ना, देहिया के बाथा लिखाई अब चिठ्ठी पतरी ना सऊंसे पोथा लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।1। चहकत मैना ना ढरकत नैना लिखाई हाथे छलकत पैमाना ना हरवाही के पैना लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।2। माथ के झोंटा ना हाथ के सोंटा लिखाई तिरिया पातर ना पिया मोटा लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।3। दूबर के रोवां ना जबर के चाम नोचाई जुलुमी आंख जब देखाई ना केहू अब डेराई अब कविता ना काथा लिखाई ।4। मम्मी-डैडी ना बाबू माई लिखाई यो ब्रो ना, हं भाई लिखाई ब्रदर आ सिस्टर इन लॉ ना देवर भउजाई लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।5। नैना के नीर ना आत्मा के पीर लिखाई खुलल आसमान ना बान्हल जंजीर लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।6। तन के उघारत ना मन के ढांपत चीर लिखाई हहकारत समुंदर ना गंगा जी के नीर लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।7। बूरूस झाड़ू ना खरहेरा कुचिया लिखाई बाबा बेबी ना बबुआ बुचिया लिखाई उछलत टोपीया ना सरियावत पगरिया लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।8। नरमी कलाई ना कुटनी पिसाई लिखाई रहो ना  बेमारी केहू अइसन दवाई लिखाई अब कविता...

हमार मन

कईसन बा मन चंचला क्षण में खिल जाला, क्षण में मउर जाला, सुख में खुब हंसेला दु:ख में हो जाला बयाला ई सुकुवार फूल होला क्षण में कुम्हीला जाला खुश होखे त बन जाला गोलगप्पा दुख में बन जाला चुप्पा, कबो कहे 'दुनिया हऽ हमार, कबो कहे 'जगत से का नाता हमार! हमरा मन के कवन इ हाल अपने कईलस जीयल मुहाल उ घमंड से भईल पैदा एही से हरमेशा रहे बेहाल बहुते कसनी मन के चाल, अब ले समझ नाहीं पावल, जे बा माटी से निकलल, फेर माटी में ही जाला घुल! कहस ठेठबिहारी सुनऽ सजनी मानऽ तु हमरी कहनी मन के कर अबो कस में ना त होखी जिनगी के रजनी