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चिरई

              *चिरई*       कतना मीठ बा बोली तोर       कतना मीठ तुं गावेलु?       संउसे अकास में पांख पसार       कतना निमन तुं उड़ेलु? लहर जस लहरा चिरई, अंगनइया में घूरमऽ चिरई। फुदुक-फुदुक कोठा पर उतरी, फुर्र-फुर्र उड़ जा चिरई।।          गाछी पर के पाकल फलन के,      नेवान   के   उ    उछाह,     चिखला पर कतना मिलेला     मन  के उ उत्साह? ऐकर भेद बतावऽ चिरई, झूमि-झूमि गावऽ चिरई। जे आ न सकऽ लगे हमरा, हमके लगे बोलावऽ चिरई।।     नन्ही चुकी घोंसला तोर     दूबर-पातर बा चोंच।     ते पर अतना निफिकिर     हई मस्ती नि:संकोच!! फकीरी ठाट चिरई, कुदल-फानल ए चिरई। कहऽ कहां सिखलु तुं झूमि-झूमि गावल ए चिरई।। राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"