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भोजपुरी शायरी-3

आदरणीय भोजपुरीया भाई बहिन लोग के सादर नम्स्कार। हम राम प्रकाश तिवारी "ठेठ बिहारी" एक बेर फेरु रउवा लोग के सोझा पेश कर रहल बानी आपन कुछ नया रचना आशा बा कि ऱउवा लोग के पसंद आई। एक बात आउरो बा कि हम जानत बानी की हमरा शायरी करे ना आवेला बाकिर हमरा लिखे के मन करेला त लिख दिहीले।। आशा बा कि रउवा लोग एह शायरीयन के भी जरुर पढेब आ हमरा के आपन कमेंट देब।। त प्रस्तुत बा भोजपुरी शायरी-3।। 8. कहंवा से अइलु गोरिया, कहंवा के जइबु, आहे बताव गोरिया काहे तरसावेलु तु ठेठ बिहारी के कइ के सोरहो श्रृगांर हो कि जब देखइबु नांही, की पियइबु नाहीं प्यार के रसवा।। 9.हाथे लिहले फुलवा गुलाब के करीं हम विचार, कि ना जाने कहंवा बाडी सजनीया हमार, कब होई रामा मिलनवा के जोग हो कि रहीया निहारे आपन सजनी के रातु दिन बईठी के ठेठ बिहारी हो।। 10. जात रहीं हम एक दिन बजार, मिल गईली रस्ता में उ त ईयार नैना से नैना मिली के भईले चार, कि होई रे गईले ठेठ बिहारी के उनुकरे से पहिली नजरीया में प्यार,।।