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हमार मन

कईसन बा मन चंचला क्षण में खिल जाला, क्षण में मउर जाला, सुख में खुब हंसेला दु:ख में हो जाला बयाला ई सुकुवार फूल होला क्षण में कुम्हीला जाला खुश होखे त बन जाला गोलगप्पा दुख में बन जाला चुप्पा, कबो कहे 'दुनिया हऽ हमार, कबो कहे 'जगत से का नाता हमार! हमरा मन के कवन इ हाल अपने कईलस जीयल मुहाल उ घमंड से भईल पैदा एही से हरमेशा रहे बेहाल बहुते कसनी मन के चाल, अब ले समझ नाहीं पावल, जे बा माटी से निकलल, फेर माटी में ही जाला घुल! कहस ठेठबिहारी सुनऽ सजनी मानऽ तु हमरी कहनी मन के कर अबो कस में ना त होखी जिनगी के रजनी

रात के बतिया

रात कईसे कटल कुछऊ पता नईखे तहरा नैना से कतना पिहनी पता नईखे बितल रात भईल भोरहरीया, का भईल रतिया कुछऊ पता नईखे जाऐब कंहवा जानत नईखीं धऽ ले हंथवा केहू की सुधि नईखीं नैनन के बरसात में बीतल बा रात कब देखनी हम बरखा जानत नईखीं के जानऽता की का तुरले बाडू  दिलवा हमार कि पैमाना तुरले बाडू पतर गईल बा हमरो जज्बात कईले कवन तु जादू बाडू कईसे कहीं की तु बेवफा बाडू जब अंखियन से ही हमके पियवले बाडू रात कईसे कटल कुछऊ पता नईखे का तुं पियवलु बुझात नईखे ठेठबिहारी के नशा चढ़ल बा अतना कि अबहीं ले कुछु लिखात नईखे राम प्रकाश तिवारी 'ठेठबिहारी'