गोधन आ रेंगनी के कांट
गोधन आ रेंगनी के कांट गोधन के प्रतिकृती रेंगनी के कांट काल्ह दियरी रहे आ सभ केहु बहुते जोर-शोर आ खुशी से इ त्यौहार मनावल। आज अब गांव घर में माई बहिनी गोधन पारी लोग ओही जा घर के मर्दाना लोग के डिप्टी लागी रेंगनी के कांट खोजे के, काहे कि आपन-आपन भाई-भतिजा के सरपला के बाद मेहरारु आ लइकी सभ एही रेंगनी के कांट अपना जीभ पर गड़ावेला लोग आ अपना के दंड देवेला लोग। हम जानत बानी की रउआ सभे इहे सोंचत होखेब की हम इ भोरे-भोरे का लेके बईठ गईनी, त साहेब इ बात हम ऐसे कह रहल बानी कि दियरी आ गोधन के बाद चार दिन चले वाला प्रकृति पूजा के सबसे बड़हन परब छठ शुरू हो जाला। जहां दियरी के तइयारी में हमनी अपना घर-दुवार के साफ-सुथरा करिले सन आ घर के कचरा कबाड़ निकाल के बहरी फेंकी ले जा, बाकिर नदी-नाहर आ पोखरा के घाटन के साफा कइल भूला जाईले जा, एही के ध्यान में राख के हमनी के पुरखा-पुरनिया लोग गोधन में रेंगनी के कांट के उपयोगिता के शुरुवात कईल लोग। रेंगनी के कांट के विशेषता ह s की इ साफ-सुथर जगहा पर ना होखे ला, इ हरमेशा गंदा गोबर-गोथार आ काई-किच आला जगहा होला। जब हमनी एकरा के खोजत गांव...