गोधन आ रेंगनी के कांट
गोधन आ रेंगनी के कांट
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| गोधन के प्रतिकृती |
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| रेंगनी के कांट |
काल्ह दियरी
रहे आ सभ केहु बहुते जोर-शोर आ खुशी से इ
त्यौहार मनावल। आज अब गांव घर में माई बहिनी गोधन पारी लोग ओही जा घर के मर्दाना
लोग के डिप्टी लागी रेंगनी के कांट खोजे के, काहे कि आपन-आपन भाई-भतिजा के सरपला
के बाद मेहरारु आ लइकी सभ एही रेंगनी के कांट अपना जीभ पर गड़ावेला लोग आ अपना के
दंड देवेला लोग।
हम जानत बानी की रउआ सभे इहे सोंचत
होखेब की हम इ भोरे-भोरे का लेके बईठ गईनी, त साहेब इ बात हम ऐसे कह रहल बानी कि
दियरी आ गोधन के बाद चार दिन चले वाला प्रकृति पूजा के सबसे बड़हन परब छठ शुरू हो जाला।
जहां दियरी के तइयारी में हमनी अपना घर-दुवार के साफ-सुथरा करिले सन आ घर के कचरा
कबाड़ निकाल के बहरी फेंकी ले जा, बाकिर नदी-नाहर आ पोखरा के घाटन के साफा कइल
भूला जाईले जा, एही के ध्यान में राख के हमनी के पुरखा-पुरनिया लोग गोधन में रेंगनी
के कांट के उपयोगिता के शुरुवात कईल लोग। रेंगनी के कांट के विशेषता हs की इ साफ-सुथर जगहा
पर ना होखे ला, इ हरमेशा गंदा गोबर-गोथार आ काई-किच आला जगहा होला। जब हमनी एकरा
के खोजत गांव के नदी-नाहर आ चाहे पोखरा-पोखरी के किनार पर चहुंपीले सन तब हमनी के
नजर उंहा चारु ओर फईलल गंदगी पर जाला, आ हमनी एह सभ जगहन के भी साफ करे के बारे
में सोंचीले जा। गोधन कुटईला के बाद हमनी हंसुआ कुदारी लेके पहुंच जाईले सन गांव
में उपलब्ध घाटन के साफ करे। चूंकि छठ व्रत प्रकृति के पूजा हs, आ एहमें
प्रकृती में उपलब्ध सभ चीज के प्रयोग कईल जाला। छठ में साफ सफाई आ सुचिता के पूरा
ध्यान राखल जाला। एही से गोधन में रेंगनी के कांट के जरुरी बनावल गईल बा।
तs आज खातिर एतना ही छठ व्रत आ एह से
जुडल कथा लेके जल्दी आयेब। तबले गोधन आ भईयादूज के हार्दिक शुभकामना के साथे राउर
आपन
राम प्रकाश तिवारी

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