कहंवा गइलु महतारी
लड़ते लड़त महामारी से
कंहवां चल गइलु महतारी
कहऽ अब नन्हकी के, के सम्हारी
का कहाई ओकरा से रोई रोई
जब ऊ माई-माई पुकारी
थाकी अंखियां ओकर रहिया निहारी
बाबू बाबू कही के, अब के पुचकारी
जेठ के दुपहरिया में मंथवा पर
बाबू के, के आपन अंचरा डारी
हो रोज सबेरे बबुआ के इस्कूलिया
के अब भेजी बरियारी
लड़ते लड़त महामारी से
कंहवां चल गइलु महतारी
रहे सभे घरवा के भीतर
कहे मोदी सभके पुकारी
तबो कुछ लोगवा काहे करे बरियारी
फइलावे के कोरोनवा रहे ऊ तइयारी
रोई रोई करजोड़ी कहे ठेठबिहारी,
रउआ अबहूं से अपना के सम्हारीं
चेतीं अबहीं से रउआ करेले निहोरा बेरी बेरी
जग से एगो गइल बिया महतारी
कि अब ना उजड़ो कवनो अउरी फुलवारी
कंहवां चल गइलु महतारी
कहऽ अब नन्हकी के, के सम्हारी
का कहाई ओकरा से रोई रोई
जब ऊ माई-माई पुकारी
थाकी अंखियां ओकर रहिया निहारी
बाबू बाबू कही के, अब के पुचकारी
जेठ के दुपहरिया में मंथवा पर
बाबू के, के आपन अंचरा डारी
हो रोज सबेरे बबुआ के इस्कूलिया
के अब भेजी बरियारी
लड़ते लड़त महामारी से
कंहवां चल गइलु महतारी
रहे सभे घरवा के भीतर
कहे मोदी सभके पुकारी
तबो कुछ लोगवा काहे करे बरियारी
फइलावे के कोरोनवा रहे ऊ तइयारी
रोई रोई करजोड़ी कहे ठेठबिहारी,
रउआ अबहूं से अपना के सम्हारीं
चेतीं अबहीं से रउआ करेले निहोरा बेरी बेरी
जग से एगो गइल बिया महतारी
कि अब ना उजड़ो कवनो अउरी फुलवारी
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