कईनी कवन कसुर
कइनी कवन कसूरवा ए बाबा ,
मिलली कलही घरनी ।
हरदम नाच नचावे ए बाबा
जइसे चक्कर घिरनी ।।
संग सेजरिया सुते के बेरिया
सखियन से बतियावेले ।
देखा देखा के अँखिया हमके
तन में आग लगावेले ।
बोलेले खरुआ के ए बाबा
जइसे खोदल बिर्हनी ।।
फेरा के फेर में पड़के फफकीं
फूटल करम हमार हो
छने छने घोंघियाले घर में
सभके बथेला कपार हो
देके दहेजवा दगलस ए बाबा
बाउर ओकर करनी
ससुरारी में ससूरजी के
देखनी हम दुरगतिया
ससुई हमरो जिनिगी में दिहलसि
बड़का भारी बिपतिया
चउका बरतन पोछा ए बाबा
घरवा के होखे बहरनी
माई से गुन सिखले बिया
सभके फोरी महमंड हो
नइहर के ऊ हीयऽ दुलारी
पइसा के बाटे घमंड हो
फुफुती उठाके गरजे ए बाबा
जइसे गरजे शेरनी
तऽ रोई रोई कहसऽ ठेठबिहारी
करवा ई दुनु जोरी
कइनी कवन कसूरवा ए बाबा
मिलली कलही घरनी।।
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