कइसे मनाईं हम त्योहार राखी के,

कइसे मनाईं हम त्योहार राखी के,
लउकत नइखी कोंख में पुतरी आँखि के ।
कइसे बुझाई हमरा प्यार राखी के,
रहत नइखे बहिनिया सोझा आंखि के।।

लूटता इज्जत दुशमनवा दुःशासन
टुकुर टुकुर ताकता पबलिक प्रशासन
जननी हीं जननी के दरद ना जानस
करेली बनके मलकिनी सिरशासन

पीट पीट छाती रोवे रोज बाबु माई
लोगवा बनल बाटे बड़हन कसाई
गली गली घूमेला भेड़िया भयंकर
कहाँ से बोलाई अब किसन कन्हाई

बाबा चाचा बाप भाई रूप धइलस पपीया
शूल बा करेजवा में फाटतारे छतिया
केकरा से बहिनी के इजति बचाईं
बाटे दरवान बाकी करता ऊ घतिया

माई बहिनी बेटी के लोग गरियावता
बेटा आ बेटी से कोंख फरियावता
मिली ना बहुरिया जब बेटी बिलखिहें
अपने जिनिगिया लो अगिया लगावता

होखे चाहीं सगरी बेटी के सम्मान  
तबे बनी देशवा आपन महान
बेटा आ बेटी में फरक नइखे कवनो
दुनो के मानल जाय एके समान 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

साकी

हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं

रात कईसे कटल नइखे कुछऊ पता