संदेश

कहंवा गइलु महतारी

लड़ते लड़त महामारी से कंहवां चल गइलु महतारी कहऽ अब नन्हकी के, के सम्हारी का कहाई ओकरा से रोई रोई जब ऊ माई-माई पुकारी थाकी अंखियां ओकर रहिया निहारी बाबू बाबू कही के, अब के पुचकारी जेठ के दुपहरिया में मंथवा पर बाबू के, के आपन अंचरा डारी हो रोज सबेरे बबुआ के इस्कूलिया  के अब भेजी बरियारी लड़ते लड़त महामारी से कंहवां चल गइलु महतारी रहे सभे घरवा के भीतर कहे मोदी सभके पुकारी तबो कुछ लोगवा काहे करे बरियारी फइलावे के कोरोनवा रहे ऊ तइयारी रोई रोई करजोड़ी कहे ठेठबिहारी, रउआ अबहूं से अपना के सम्हारीं चेतीं अबहीं से रउआ करेले निहोरा बेरी बेरी जग से एगो गइल बिया महतारी कि अब ना उजड़ो कवनो अउरी फुलवारी

आवऽ इंसान बनल जाओ

*एगो प्रयास कइले बानी, शायद रउआ सभे के पसन पड़ी। धर्म सूचक शब्दन के प्रयोग केवल भावना संप्रेषण खातिर बा केहू के भावना के ठेस पहुंचावे खातिर ना।* हम हिन्दू हईं, आ तूं मुसलमान बाकिर हईं हमनी पहिले इंसान हमरा हिन्दू भइला पर बा गुमान तोहरा बा गुमान बन मुसलमान आज तोहार खुदा तहरा से नाराज़ बाड़े हमरो भगवान हमरा से नाराज़ कबो कइले होखबऽ गुनाह तुंहु कबो कइले पाप होखेब हमहूं इंसान हो इंसानियत के भूले के खता मालिक दे रहल बाड़े हमनी के सजा ना मंदिर में बोला रहल बाड़े भगवान ना मस्जिद से आवता खुदा के अजान खता हमरो त ओतने ही होई गलती तहरो त ओतने ही होई इंसान हईं त इंसान बनल जाए इंसानियत के धर्म के अपनावल जाए बिगड़ रहल बा जवन सदभाव आवऽ समय रहते संभालल जाव हम चाहे ईश्वर कहीं तूं चाहे अल्लाह कहऽ रूप आ नांव बा अनेक हकीकत में बाड़े ऊ एक छोड़कर हिन्दू मुसलमान मिलकर चल आवऽ हमनी बनीं एक आ बनीं नेक बनी सभे भारतीय प्रत्येक अब हम अपना भगवान के मनाईं तूं अपना खुदा के गोहरावऽ भाई एह विपत से अब दीं उबार हे ईश्वर-अल्लाह करीं हमनी पुकार दीं मौका हमरा के एक बार बनीं इ...

हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं

हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं आवऽ एगो बात बताईं गाथा तोहके आपन सुनाईं दुल्हीन के हाथ के चूड़ी हईं कोहबर के दलही पूड़ी हईं मिश्री से मीठ मिठाई हईं मीठा के बनल लकठो हम सुरुका चिउरा आ चिउरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं अहिल्या के तारण हईं राजेन्द्र के सारण हईं जेपी के आंदोलन हईं गांधी के चम्पारण हम राजनीति के धूरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं कुंवर सिंह के हूंकार हईं ! मंगल पांडे के यलगार हईं अब्दुल हमीद के कुर्बानी हईं हरदम उफनत जवानी हम देशप्रेम से परिपूरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं अंजन-प्रदीप के गीत हईं चित्रगुप्त के संगीत हईं बिस्मिल्लाह के तान हईं महेंद्र के पूर्वी गान हम रंगमंच के भिखारी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं बनारस के घाट हईं सोनपुर के हाट हईं गंगा-सरयू के पाट हईं राष्ट्र के उन्नत ललाट हम मस्त ठाट फकीरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं सोहर झूमर खेलवना हईं बोली भाखा के गहना हईं होरी चइता आ कजरी हम आरा छपरा मिर्जापुरी हईं ठेठबिहारी के माई भोजपुरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी" ग्राम पोस्ट: भटकेसरी जिला: छपरा

साकी

आपन जुठ जे कभी हमके पिया देलs, लबे -साग़र, ‘लबे -साक़ी’ के मजा देला। तहरा मस्ती के हाल अजब देखले बानी, शराब पिये से पहिले सुरुर होखेला। धोखा से पिया देले रहीं, एहू के दू घूँट, पहिले से नरम बा, वायज़ के ज़बाँ अब। करवट लेवेे ला फूलन में शराब, हमसे एह फ़स्ल में तौबा होखी? साक़ी,हेने त देखs हमहूं देर मस्त बानी, कुछ निगह-ए-मस्ती भी मिला दs शराब में । पियत जाईं हम जाम पर जाम भी, लेत जाईं साक़ी तहार नाम भी। जे छीन के पी सकता, पी लेता अब त, मैखाना में ए भाई, नया रीत चलल बा। पिये वाला के नाम भी ना बांचल मैखाना बा उदास, कि साक़ी ना रहल । ई असर उनका पर भइल, सोहबते- मस्ताना के, निहुर के मुँह चूम लिहलख शीशा पैमाना के। बेखुदी में एगो मयकश, कह गइल राज़े–दिल, आज तक ऐ दोस्त, सारा मयकदा बदनाम बा। दिल मिलल शीशा से, आँख लड़ल पैमाना से, हम कहाँ जाएब साक़ी,तहरा मैखाना से। पिया दs अंजुरी से साक़ी, जे हमरा से नफ़रत बा, प्याला ना देबs, मत दs, शराब त दs। हिया के आग बुताये, जेसे, जल्दी उ पानी लेआवs, लगा के बर्फ़ में साक़ी, सुराहिये-मय’ लेआवs।

बस अतना कs दs ए जिनगी

बस अतना कs दs ए जिनगी हरदम हंसत मुसकात रहे, दुखवा के कवनो ना बात रहे, खुशहाली के हरमेशा मिलत सौगात रहे, चिंता-फिक़िर से ना कवनो मुलाकात रहे, ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। जबो केहु से मिले त हंसत-हंसावत रहे, हंसत खेलत हरदम इ गात रहे, चाह के भी ना केहु बिलगा सके, अइसन कुछ नात रहे, ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। चाहे हो फज़िरे चाहे रात रहे, सुतलो जगले हरमेशा जिंदा जज्बात रहे, हरदम हमरो माईभाखा अहवात रहे, लिखी के कहस ठेठबिहारी जवन उनकी मनके बात रहे ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। -----राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"

नैना से नैना मिलाके

नैना से नैना मिलाके कहां जातारु गोरी? हमके दिवाना बनाके काहे छोड़लु हमके गोरी? आपन पागल बनाके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।1। संगे जिए-मरे के खाके किरिया काहे फेर फेरेलु नज़रिया हो कि कहs कवन भइल हमसे खसुर करी दिहलु तुं हमके अपना से दूर काहे कहेलु तुं जियs अब हमके बिसराके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।2। जब-जब बाजे तहरो पायल मनवा होला हमरो घायल जब खन-खन खनकेला कंगनवा तब धक-धक धड़केला मनवा मिलबु ना जे तुं हमकेsssss तs सांच कहिले गोरी मर जाएब हम माहुर खाके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।3। कवन कमी रहे ठेठबिहारी में साथ न छोड़बु कहियो कहले रहलु भरके हमके अंकवारि में तब काहे छोड़ेलु हमके जान मझधारी में अरे हम त लागल रहनी अपना मिलन के तइयारी में होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।4।

चिरई

              *चिरई*       कतना मीठ बा बोली तोर       कतना मीठ तुं गावेलु?       संउसे अकास में पांख पसार       कतना निमन तुं उड़ेलु? लहर जस लहरा चिरई, अंगनइया में घूरमऽ चिरई। फुदुक-फुदुक कोठा पर उतरी, फुर्र-फुर्र उड़ जा चिरई।।          गाछी पर के पाकल फलन के,      नेवान   के   उ    उछाह,     चिखला पर कतना मिलेला     मन  के उ उत्साह? ऐकर भेद बतावऽ चिरई, झूमि-झूमि गावऽ चिरई। जे आ न सकऽ लगे हमरा, हमके लगे बोलावऽ चिरई।।     नन्ही चुकी घोंसला तोर     दूबर-पातर बा चोंच।     ते पर अतना निफिकिर     हई मस्ती नि:संकोच!! फकीरी ठाट चिरई, कुदल-फानल ए चिरई। कहऽ कहां सिखलु तुं झूमि-झूमि गावल ए चिरई।। राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"