संदेश

साकी

आपन जुठ जे कभी हमके पिया देलs, लबे -साग़र, ‘लबे -साक़ी’ के मजा देला। तहरा मस्ती के हाल अजब देखले बानी, शराब पिये से पहिले सुरुर होखेला। धोखा से पिया देले रहीं, एहू के दू घूँट, पहिले से नरम बा, वायज़ के ज़बाँ अब। करवट लेवेे ला फूलन में शराब, हमसे एह फ़स्ल में तौबा होखी? साक़ी,हेने त देखs हमहूं देर मस्त बानी, कुछ निगह-ए-मस्ती भी मिला दs शराब में । पियत जाईं हम जाम पर जाम भी, लेत जाईं साक़ी तहार नाम भी। जे छीन के पी सकता, पी लेता अब त, मैखाना में ए भाई, नया रीत चलल बा। पिये वाला के नाम भी ना बांचल मैखाना बा उदास, कि साक़ी ना रहल । ई असर उनका पर भइल, सोहबते- मस्ताना के, निहुर के मुँह चूम लिहलख शीशा पैमाना के। बेखुदी में एगो मयकश, कह गइल राज़े–दिल, आज तक ऐ दोस्त, सारा मयकदा बदनाम बा। दिल मिलल शीशा से, आँख लड़ल पैमाना से, हम कहाँ जाएब साक़ी,तहरा मैखाना से। पिया दs अंजुरी से साक़ी, जे हमरा से नफ़रत बा, प्याला ना देबs, मत दs, शराब त दs। हिया के आग बुताये, जेसे, जल्दी उ पानी लेआवs, लगा के बर्फ़ में साक़ी, सुराहिये-मय’ लेआवs।

बस अतना कs दs ए जिनगी

बस अतना कs दs ए जिनगी हरदम हंसत मुसकात रहे, दुखवा के कवनो ना बात रहे, खुशहाली के हरमेशा मिलत सौगात रहे, चिंता-फिक़िर से ना कवनो मुलाकात रहे, ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। जबो केहु से मिले त हंसत-हंसावत रहे, हंसत खेलत हरदम इ गात रहे, चाह के भी ना केहु बिलगा सके, अइसन कुछ नात रहे, ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। चाहे हो फज़िरे चाहे रात रहे, सुतलो जगले हरमेशा जिंदा जज्बात रहे, हरदम हमरो माईभाखा अहवात रहे, लिखी के कहस ठेठबिहारी जवन उनकी मनके बात रहे ए जिनगी तु बस अतना कs दs त कहs का बात रहे। -----राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"

नैना से नैना मिलाके

नैना से नैना मिलाके कहां जातारु गोरी? हमके दिवाना बनाके काहे छोड़लु हमके गोरी? आपन पागल बनाके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।1। संगे जिए-मरे के खाके किरिया काहे फेर फेरेलु नज़रिया हो कि कहs कवन भइल हमसे खसुर करी दिहलु तुं हमके अपना से दूर काहे कहेलु तुं जियs अब हमके बिसराके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।2। जब-जब बाजे तहरो पायल मनवा होला हमरो घायल जब खन-खन खनकेला कंगनवा तब धक-धक धड़केला मनवा मिलबु ना जे तुं हमकेsssss तs सांच कहिले गोरी मर जाएब हम माहुर खाके होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।3। कवन कमी रहे ठेठबिहारी में साथ न छोड़बु कहियो कहले रहलु भरके हमके अंकवारि में तब काहे छोड़ेलु हमके जान मझधारी में अरे हम त लागल रहनी अपना मिलन के तइयारी में होssssss कहs कहां जातारु गोरी नैना से नैना मिलाके।4।

चिरई

              *चिरई*       कतना मीठ बा बोली तोर       कतना मीठ तुं गावेलु?       संउसे अकास में पांख पसार       कतना निमन तुं उड़ेलु? लहर जस लहरा चिरई, अंगनइया में घूरमऽ चिरई। फुदुक-फुदुक कोठा पर उतरी, फुर्र-फुर्र उड़ जा चिरई।।          गाछी पर के पाकल फलन के,      नेवान   के   उ    उछाह,     चिखला पर कतना मिलेला     मन  के उ उत्साह? ऐकर भेद बतावऽ चिरई, झूमि-झूमि गावऽ चिरई। जे आ न सकऽ लगे हमरा, हमके लगे बोलावऽ चिरई।।     नन्ही चुकी घोंसला तोर     दूबर-पातर बा चोंच।     ते पर अतना निफिकिर     हई मस्ती नि:संकोच!! फकीरी ठाट चिरई, कुदल-फानल ए चिरई। कहऽ कहां सिखलु तुं झूमि-झूमि गावल ए चिरई।। राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"

ना हऽ इ प्रधानी के चुनाव

ना हऽ ई गंउवा के प्रधानी के चुनाव ए बाबा झूंठऊ के तुं हमनी के भरमावऽ मत ए बाबा बहतर हजार के सपना कतहीं आउर तुं देखावऽ ए बाबा छंहतर सब तहार जानी ला, झुनझुना आपन तुं कतहीं आउर बजावऽ ए बाबा ना हऽ ई गंउवा के प्रधानी के चुनाव ए बाबा।। बनीं हम अफसर चाहे चकुदार ए बाबा ना बनेब कबो देसवा के गद्दार ए बाबा मेहनत मजुरी ईमानदारी में बा नांव ए बाबा ना हऽ ई गंउवा के प्रधानी के चुनाव ए बाबा साड़ी कंबल आ पउवा पर ना वोट बिकाव ए बाबा हक इ हमार केहू से ना छिनाव ए बाबा अबकी होई अइसन उपाय ए बाबा रखबऽ इयाद तु पूर्वांचल के नांव ए बाबा ना हऽ ई गंउवा के प्रधानी के चुनाव ए बाबा

रात कईसे कटल नइखे कुछऊ पता

रात कईसे कटल नइखे कुछऊ पता पियनी अँखिया से केतना पता ना चलल भोरे पसरल किरिनिया कपारे चढ़ल केतना मस्ती भइल बा पता ना चलल। । के सम्हारी समझ के परे जिन्दगी केहू हँथवा पकड़ ले करीं बंदगी रात नैना से केतना बहल नीर बा मन दहाईल बा कहँवा पता ना चलल।। तोहार पैमाना का बा दिल तूरे खातिर काहें भइलु तू निरमोही जुलुमी शातिर आँख से आँख जबसे मिलल बा प्रिये खुद हेरा गइनी कब से पता ना चलल। । ठेठ हमरा के लोगवा बिहारी कहे हमरा दिलवा के कोना भोजपुरी रहे माई तोहरे चरनिया में चहकत बढ़ल कब दो हो गइनी ओजगर पता ना चलल रामप्रकाश तिवारी

कइसे मनाईं हम त्योहार राखी के,

कइसे मनाईं हम त्योहार राखी के, लउकत नइखी कोंख में पुतरी आँखि के । कइसे बुझाई हमरा प्यार राखी के, रहत नइखे बहिनिया सोझा आंखि के।। लूटता इज्जत दुशमनवा दुःशासन टुकुर टुकुर ताकता पबलिक प्रशासन जननी हीं जननी के दरद ना जानस करेली बनके मलकिनी सिरशासन पीट पीट छाती रोवे रोज बाबु माई लोगवा बनल बाटे बड़हन कसाई गली गली घूमेला भेड़िया भयंकर कहाँ से बोलाई अब किसन कन्हाई बाबा चाचा बाप भाई रूप धइलस पपीया शूल बा करेजवा में फाटतारे छतिया केकरा से बहिनी के इजति बचाईं बाटे दरवान बाकी करता ऊ घतिया माई बहिनी बेटी के लोग गरियावता बेटा आ बेटी से कोंख फरियावता मिली ना बहुरिया जब बेटी बिलखिहें अपने जिनिगिया लो अगिया लगावता होखे चाहीं सगरी बेटी के सम्मान   तबे बनी देशवा आपन महान बेटा आ बेटी में फरक नइखे कवनो दुनो के मानल जाय एके समान