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ई चुनावी साल बा
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का जाने काहे बदलल चाल बा का हो, का ई चुनावी साल बा? राम भी उनकरा चांहि रहमान भी उनकरा चांहि चुनाव के कइसन इ कमाल बा अबकी बदलल उनकर चाल बा मंदिर मस्जिद दउरत हाल बेहाल बा का हो, का ई चुनावी साल बा? जनता के जियल मुहाल बा नेता भईल मालामाल बा युवा बेरोजगार त किसान कंगाल बा बाकि नेताजी के ना कवनो मलाल बा का हो, का ई चुनावी साल बा? कहे नेता मन में अपना जनता देखऽ मत तुं सपना अबहीं दिनवा तोहार बा इलेक्शन बाद हमरो पांच साल बा तबो देखऽ छले खातिर झोरी पसार बनल ई कंगाल बा का हो, का ई चुनावी साल बा? हर बेर चुनाव से पहिले बतावल बा तबो सभकर ऊहे हाल बा का तुंहुं झूठे अनका के दुसेलऽ ठेठबिहारी जब सभ कइल तहरे कमाल बा का हो,का ई चुनावी साल बा? -राम प्रकाश तिवारी'ठेठबिहारी'
अब कविता ना काथा लिखाई
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*अब कविता ना काथा लिखाई* सेजिया के बतिया ना, देहिया के बाथा लिखाई अब चिठ्ठी पतरी ना सऊंसे पोथा लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।1। चहकत मैना ना ढरकत नैना लिखाई हाथे छलकत पैमाना ना हरवाही के पैना लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।2। माथ के झोंटा ना हाथ के सोंटा लिखाई तिरिया पातर ना पिया मोटा लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।3। दूबर के रोवां ना जबर के चाम नोचाई जुलुमी आंख जब देखाई ना केहू अब डेराई अब कविता ना काथा लिखाई ।4। मम्मी-डैडी ना बाबू माई लिखाई यो ब्रो ना, हं भाई लिखाई ब्रदर आ सिस्टर इन लॉ ना देवर भउजाई लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।5। नैना के नीर ना आत्मा के पीर लिखाई खुलल आसमान ना बान्हल जंजीर लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।6। तन के उघारत ना मन के ढांपत चीर लिखाई हहकारत समुंदर ना गंगा जी के नीर लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।7। बूरूस झाड़ू ना खरहेरा कुचिया लिखाई बाबा बेबी ना बबुआ बुचिया लिखाई उछलत टोपीया ना सरियावत पगरिया लिखाई अब कविता ना काथा लिखाई ।8। नरमी कलाई ना कुटनी पिसाई लिखाई रहो ना बेमारी केहू अइसन दवाई लिखाई अब कविता...
हमार मन
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कईसन बा मन चंचला क्षण में खिल जाला, क्षण में मउर जाला, सुख में खुब हंसेला दु:ख में हो जाला बयाला ई सुकुवार फूल होला क्षण में कुम्हीला जाला खुश होखे त बन जाला गोलगप्पा दुख में बन जाला चुप्पा, कबो कहे 'दुनिया हऽ हमार, कबो कहे 'जगत से का नाता हमार! हमरा मन के कवन इ हाल अपने कईलस जीयल मुहाल उ घमंड से भईल पैदा एही से हरमेशा रहे बेहाल बहुते कसनी मन के चाल, अब ले समझ नाहीं पावल, जे बा माटी से निकलल, फेर माटी में ही जाला घुल! कहस ठेठबिहारी सुनऽ सजनी मानऽ तु हमरी कहनी मन के कर अबो कस में ना त होखी जिनगी के रजनी
रात के बतिया
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रात कईसे कटल कुछऊ पता नईखे तहरा नैना से कतना पिहनी पता नईखे बितल रात भईल भोरहरीया, का भईल रतिया कुछऊ पता नईखे जाऐब कंहवा जानत नईखीं धऽ ले हंथवा केहू की सुधि नईखीं नैनन के बरसात में बीतल बा रात कब देखनी हम बरखा जानत नईखीं के जानऽता की का तुरले बाडू दिलवा हमार कि पैमाना तुरले बाडू पतर गईल बा हमरो जज्बात कईले कवन तु जादू बाडू कईसे कहीं की तु बेवफा बाडू जब अंखियन से ही हमके पियवले बाडू रात कईसे कटल कुछऊ पता नईखे का तुं पियवलु बुझात नईखे ठेठबिहारी के नशा चढ़ल बा अतना कि अबहीं ले कुछु लिखात नईखे राम प्रकाश तिवारी 'ठेठबिहारी'
कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं
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तुलसी के राम लिखीं चाहे कबीरा के गान लिखीं सूर के श्याम लिखीं, बुद्ध के ज्ञान लिखीं चाहे महावीर के नाम लिखीं कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं। आरा,बलियां, छपरा चाहे सिवान लिखीं धरती चाहे असमान लिखीं कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं । कुंवर सिंह के ललकार लिखीं मंगल पांडे के यलगार लिखीं चित्तु पांडे के नाम लिखीं चाहे अब्दुल हमीद महान लिखीं कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं । अरेराज महादेव लिखीं चाहे गौतमस्थान लिखीं मेंहदार के महेंद्रानाथ लिखीं चाहे काशी विश्वनाथ लिखीं कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं। आमी भवानी लिखीं, चाहे मइहर महारानी लिखीं आइरन माई लिखीं चाहे थावे के कहानी लिखीं कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं। गंगा के धार लिखीं, सरयू के किनार लिखीं चाहे गंडक आ कोसी के दहार लिखीं कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं । सोनपुर के रेला लिखीं बनियापुर के खेला लिखीं चाहे ददरी के मेला लिखीं कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं । मुसहरी के पेड़ा लिखीं बनियापुर के मीठा के जलेबी लिखीं बनारस के पान लिखीं चाहे कुशीनगर के धान लिखीं कुछु लिखीं बाकिर भोजपुरी लिखीं। भिखारी के ...
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हमरा चाहीं आजादी हमरा चाहीं आजादी हं हमरा चाहीं आजादी आजादी चाहीं अशिक्षा से भूखमरी आऊर गरीबी से हमरा चाहीं आजादी चाहीं आजादी आतंकवाद से देश के गद्दारन से नेतवन के झूंठा भाषण से देशवा में लहकत अंगारन से दहकत नदी के किनारन से हमरा चाहीं आजादी सीमवा पर बरसत गोलन से खाए के तरसत बचवन से घर में रहत सपोंलन से अंचरा के बेधत दोगलन से हं हमरा चाहीं आजादी माई के नांव पर कटात बेटवन से लचकत कमरिया पर बरिसत नोटवन से कचहरी में बेचात करीया कोटवन से चुनाव में बोतल से बदलात वोटन से हं हमरा चाहीं आजादी उड़े के सपनवन के रोकत गोड़वन में पड़ल बेड़ियन से संच्चाई लिखे से रोकत हथकड़ीयन से दहेज में जरत पतोहियन से कोख में मुअत बेटियन से हं हमरा चाहीं आजादी खुन में सउनाईल कशमीरी सेबन से मौत बांटत जहरीला पनीयन से दुनिया के मिटावे के तइयार बारूदी बगीचवन से दुश्मन के नापाक इरादन से हं हमरा चाहीं आजादी जातीपाती के नांव पर होखत दंगन से रोटी कपड़ा के रोवत भिखमंगा देहियन से मजलूमन के पेरत दबंगन से इज्जत के लूटत लफ...