हमरा चाहीं आजादी हमरा चाहीं आजादी हं हमरा चाहीं आजादी आजादी चाहीं अशिक्षा से भूखमरी आऊर गरीबी से हमरा चाहीं आजादी चाहीं आजादी आतंकवाद से देश के गद्दारन से नेतवन के झूंठा भाषण से देशवा में लहकत अंगारन से दहकत नदी के किनारन से हमरा चाहीं आजादी सीमवा पर बरसत गोलन से खाए के तरसत बचवन से घर में रहत सपोंलन से अंचरा के बेधत दोगलन से हं हमरा चाहीं आजादी माई के नांव पर कटात बेटवन से लचकत कमरिया पर बरिसत नोटवन से कचहरी में बेचात करीया कोटवन से चुनाव में बोतल से बदलात वोटन से हं हमरा चाहीं आजादी उड़े के सपनवन के रोकत गोड़वन में पड़ल बेड़ियन से संच्चाई लिखे से रोकत हथकड़ीयन से दहेज में जरत पतोहियन से कोख में मुअत बेटियन से हं हमरा चाहीं आजादी खुन में सउनाईल कशमीरी सेबन से मौत बांटत जहरीला पनीयन से दुनिया के मिटावे के तइयार बारूदी बगीचवन से दुश्मन के नापाक इरादन से हं हमरा चाहीं आजादी जातीपाती के नांव पर होखत दंगन से रोटी कपड़ा के रोवत भिखमंगा देहियन से मजलूमन के पेरत दबंगन से इज्जत के लूटत लफ...
संदेश
गोधन आ रेंगनी के कांट
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गोधन आ रेंगनी के कांट गोधन के प्रतिकृती रेंगनी के कांट काल्ह दियरी रहे आ सभ केहु बहुते जोर-शोर आ खुशी से इ त्यौहार मनावल। आज अब गांव घर में माई बहिनी गोधन पारी लोग ओही जा घर के मर्दाना लोग के डिप्टी लागी रेंगनी के कांट खोजे के, काहे कि आपन-आपन भाई-भतिजा के सरपला के बाद मेहरारु आ लइकी सभ एही रेंगनी के कांट अपना जीभ पर गड़ावेला लोग आ अपना के दंड देवेला लोग। हम जानत बानी की रउआ सभे इहे सोंचत होखेब की हम इ भोरे-भोरे का लेके बईठ गईनी, त साहेब इ बात हम ऐसे कह रहल बानी कि दियरी आ गोधन के बाद चार दिन चले वाला प्रकृति पूजा के सबसे बड़हन परब छठ शुरू हो जाला। जहां दियरी के तइयारी में हमनी अपना घर-दुवार के साफ-सुथरा करिले सन आ घर के कचरा कबाड़ निकाल के बहरी फेंकी ले जा, बाकिर नदी-नाहर आ पोखरा के घाटन के साफा कइल भूला जाईले जा, एही के ध्यान में राख के हमनी के पुरखा-पुरनिया लोग गोधन में रेंगनी के कांट के उपयोगिता के शुरुवात कईल लोग। रेंगनी के कांट के विशेषता ह s की इ साफ-सुथर जगहा पर ना होखे ला, इ हरमेशा गंदा गोबर-गोथार आ काई-किच आला जगहा होला। जब हमनी एकरा के खोजत गांव...
आईल बसंत
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आईल बसंत जब से चढल बसंत मन में खुशी भईल अपार बितल पतझड़ आईल बहार कि छछनत जिया के मिली अब करार कहीं लता-पता लपिटाए तरुवर से, जईसे नदी मिले सागर से।। त देखी के ई मिलन भरि लोरवा दुनु नयन कहीं मनमें गोरी करे विचार असहीं होई पिया से कबो मिलनवा हमार, बारह बरिस से पिया रहले बहरा ना जाने कहीया भेंटब हमरा कब उ शुभ दिन आई, पिया के बोलिया सुनाई बड़ा रे जुलुमी रउओ ठेठबिहारी कईसे हम तोहे मन के पीर समुझाईं की अब त घरवा आंई ए बलम हमहूं रऊवा संगवा फगुआ मनांई।।
यूपी को ये साथ पसंद है।
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यूपी को ये साथ पसंद है। हां यूपी को ये साथ पसंद है, क्योंकि नौटंकी में इसका कोई सानी नहीं है। हां यूपी को ये साथ पसंद है, क्योंकि पप्पू और बबूआ सा नादान कहीं और नहीं है हां यूपी को ये साथ पसंद है, क्योंकि चोरी-चकारी सीनाजोरी में बहन-बेटीयों की इज्जत की रखवारी ही इनसे जरूरी है हां यूपी को ये साथ पसंद है, फटा कुर्ता और पंचर साईकिल वाले जोकर इनसा कोई और नहीं है हाथ का साथ गरीबों की जेब साफ और भाई-भतिजों के सारे गुनाह माफ इनसा परिवारवाद व भाई-भतिजावाद कहीं और नहीं है। हां यूपी को ये साथ पसंद है, कुर्सी को बचाने में सब कुछ झोंकना लोभ-प्रलोभन, और तुष्टिकरन करने वाला इनसा कोई और नहीं है इसिलये यूपी को ये साथ पसंद है भाई हमको तो नमो की चाय पसंद है थोडी कड़वी थोड़ी मीठी चाय है प्रदेश को बचाने और आगे बढाने को अब सब एक राय हैं गुंडाराज भ्रष्टाचार और भाई-भतिजावाद की सरकार हटाना है। हां यूपी को ये साथ पसंद है, क्योंकि इस को लखनऊ नहीं मुम्बई ही भेजना है तो कहे ठेठबिहारी अब की है भाजपा की बारी मोदी और शाह की जोड़ी पसंद है
विरह वेदना
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प्यार के असरा मन में जगाके कहां जालs ए बलमा पिरितिया लगाके कहले रहल तु हमसे ना जाने कवन-कवन बतिया कईले रहल..........हो कि दिहले रहल तु प्यार के वचनिया का भईल तोहरो उ सभ किरिया लिहले रहलs जवन तु हमरा साथे साथ निभईबs तु सात जनम तक कहले रहलs चूमके माथा काहे भूली गईलs जाके सहरीया मे हमके जिया में उठेला लहरिया हमरो की राजा हो आजईतS एक बेरिया तोहरा के बसा लितीं हम नयना के भीतरिया हो की कहां जालs ए बलमा लगाके पिरितिया
हमार भाषा भोजपुरी
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दुल्हिन के हाथ के चूड़ी ह,त भोज में के पूड़ी ह सभ भाषा से मीठ, हमार भाषा भोजपुरी ह एहिमे मिली रउवा सोहर , चउमासा त चइता कजरी आ होरी गीत इहंई बा छठ तेरस आ शिवरात्रि संस्कृत के बेटी त हिंदी के बहिनी ह हमार भाषा भोजपुरी , त कहीं काहे ए सरकार बनवले बानी एके मजबूरी, काहे नइखीं देत एकर हक़ एके जवन बा जरूरी , अरे अब त आपन अंघी के तुरीं आ बनायीं भोजपुरी के भी भाषा जरूरी इहे निहोरा बा रउरा से आज हमनी सभ के प्यार से मांगत तानी जा आज हक़ आपन देदेब त होई राउरि जय जयकारी नाही त खाएब रउवो मुँहे हमनी के पगधूरी कहे ठेठबिहारी सुनी ऐ सभी नेता लोग भोजपुरी के कहानी जवन बा बहुते बुरी जवन माटी दिहलस बड़का बड़का नेता आ मंत्री जहाँ भईले अफसर से ले के संत्री, जहाँ के बाड़े गृहमंत्री आ प्रधानमंत्री उहे भाषा आज भईल बा मजबूर, काहे नईखे लेत केहु सुधि एकर
जय भोले शंकर
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जय भोले शंकर चढ़ते सावन लागे मनवा झुमे जईसे झुमे बन में कवनो मोर चल रे मन भोले के नगरीया चढावल जाई गंगा जी के पनीया भरी भरी गगरीया हो,बाबा के कपरीया पान फुल भोला के निक ना लागे मानस भोला खाई के गोला भंगीया पेड़ा मिठाई शिवजी के मनही ना भावे होले खुस बाबा जब चढे धतुर-अकवनीया चल रे मन बाबा के नगरीया त्रिशुलवे पर बा बाटे बसल काशी नगरीया हो खुल जाले जहंवा सभ पाप के गठरीया चल चल रे मन ओही बाबा के नगरीया कहे अपना मनवा के बतीया त कर जोड़ी पईयां परी करी ले विनितीया सुनलीहीं बाबा ठेठबिहारी के हो अरजीया सुख शांति होखे चंहु ओरिया दुनिया में बजावे डंका राउर सभ भोजपुरीया दिहीं ए बाबा अबकी इहे असीसीया