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हर धड़कन पर नाम लिखनी

  अपना हर धड़कन पर नाम उनकर लिख लिहनी;  अइसन करत ना जननी कि हम कुछ गलत कइनी;  ऊ साथ निभावे के वादा कऽ के हमसे बदल गइले;  बेवफाई से ऊ अपना, हमरा के कुछ सबक दे गइले; साँझ सवेरे रोज जेकरा नामे हम आपन करत रहनी; ऊ आज केहू आउर के संगे बाँचत बाड़े प्रेम कहानी; उनकरा इयाद में अँखिया आजो रहता हमार भींजल: रह-रह लउकता उनकर ऊ मने-मने हमरा पर हँसल; कहाँ गइल ऊ बंद मुँह से अँखिया से सभ बात कहल; काहे मेंटल ऊ प्यार जवन हमनी में भइल कबो रहल; आदत तहार बा रिश्ता बना के नाता सभका से तुड़ल; आदत हमार बा नाता नेह के अपना दुश्मनो से जोड़ल; रहिया आजो निहारता अँखिया उनकरा लवटि आवे के; बाकी इरादा बुझाता उनकर अबहीं हमरा के तड़पावे के। राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी"

सोंच सकऽ त सोंचऽ

* सोंच सकऽ त सोंचऽ * ऐ भाई सोंच सकऽ त सोंचऽ कंहवा बा सिस्टम में लोज जे रहे दउर में दउड़त फर्राटा काहे ओकरा गोड़ में बा मोच सोंच सकऽ त सोंचऽ।।1।। हाथ पसार रोजी रोटी जनता मांगे कर जोड़ नेता मांगस खाली वोट काम ना कवनो अफसर करस बिना लिहले कड़क गुलाबी नोट देखऽ कइसन भइल सभकर सोंच सोंच सकऽ त सोंचऽ।।2।। नवकन के देश में बा ना कवनो खोज नोकरी मंगला पर गोजी मिले रोज माई कहस हमरो बबुआ बने अफसर बाबूजी कहस इनके मनमौजी अक्सर एही में पिसाता नवहन के भविष्य रोज सोंच सकऽ त सोंचऽ।।3।। सभ जगहा हड़ताल आ प्रदुषण आपने आज बनल बा दुशासन सीमा पर बरिसे गोली रोजे रोज वीरन के बहादुरी के घरवा में होखेला अब चिल्ला के खोजी रोज सोंच सकऽ त सोंचऽ।।4।। दुश्मन जे ललकारे कऽ के विस्फोट घर में घुस के मारीं कसके लंगोट तबो ऊ घातकी बन भेड़िया बा ताक में बइठल लेके कवनो ओट मौका मिलते लीही ऊ मुंहवा नोंच सोंच सकऽ त सोंचऽ।।5।। घटल बा उत्पादन क्षमता रुकल बा धन के रस्ता अमरीकी डॉलर के सोझा गिरल बा अब आपन नोट सभका कपारे पड़ल बा मंहगाई डाइन के चोट खर्ची घर के चली कइसे इहे रहल बा सभे सोंच सोंच सकऽ त स...

कहंवा गइलु महतारी

लड़ते लड़त महामारी से कंहवां चल गइलु महतारी कहऽ अब नन्हकी के, के सम्हारी का कहाई ओकरा से रोई रोई जब ऊ माई-माई पुकारी थाकी अंखियां ओकर रहिया निहारी बाबू बाबू कही के, अब के पुचकारी जेठ के दुपहरिया में मंथवा पर बाबू के, के आपन अंचरा डारी हो रोज सबेरे बबुआ के इस्कूलिया  के अब भेजी बरियारी लड़ते लड़त महामारी से कंहवां चल गइलु महतारी रहे सभे घरवा के भीतर कहे मोदी सभके पुकारी तबो कुछ लोगवा काहे करे बरियारी फइलावे के कोरोनवा रहे ऊ तइयारी रोई रोई करजोड़ी कहे ठेठबिहारी, रउआ अबहूं से अपना के सम्हारीं चेतीं अबहीं से रउआ करेले निहोरा बेरी बेरी जग से एगो गइल बिया महतारी कि अब ना उजड़ो कवनो अउरी फुलवारी

आवऽ इंसान बनल जाओ

*एगो प्रयास कइले बानी, शायद रउआ सभे के पसन पड़ी। धर्म सूचक शब्दन के प्रयोग केवल भावना संप्रेषण खातिर बा केहू के भावना के ठेस पहुंचावे खातिर ना।* हम हिन्दू हईं, आ तूं मुसलमान बाकिर हईं हमनी पहिले इंसान हमरा हिन्दू भइला पर बा गुमान तोहरा बा गुमान बन मुसलमान आज तोहार खुदा तहरा से नाराज़ बाड़े हमरो भगवान हमरा से नाराज़ कबो कइले होखबऽ गुनाह तुंहु कबो कइले पाप होखेब हमहूं इंसान हो इंसानियत के भूले के खता मालिक दे रहल बाड़े हमनी के सजा ना मंदिर में बोला रहल बाड़े भगवान ना मस्जिद से आवता खुदा के अजान खता हमरो त ओतने ही होई गलती तहरो त ओतने ही होई इंसान हईं त इंसान बनल जाए इंसानियत के धर्म के अपनावल जाए बिगड़ रहल बा जवन सदभाव आवऽ समय रहते संभालल जाव हम चाहे ईश्वर कहीं तूं चाहे अल्लाह कहऽ रूप आ नांव बा अनेक हकीकत में बाड़े ऊ एक छोड़कर हिन्दू मुसलमान मिलकर चल आवऽ हमनी बनीं एक आ बनीं नेक बनी सभे भारतीय प्रत्येक अब हम अपना भगवान के मनाईं तूं अपना खुदा के गोहरावऽ भाई एह विपत से अब दीं उबार हे ईश्वर-अल्लाह करीं हमनी पुकार दीं मौका हमरा के एक बार बनीं इ...

हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं

हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं आवऽ एगो बात बताईं गाथा तोहके आपन सुनाईं दुल्हीन के हाथ के चूड़ी हईं कोहबर के दलही पूड़ी हईं मिश्री से मीठ मिठाई हईं मीठा के बनल लकठो हम सुरुका चिउरा आ चिउरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं अहिल्या के तारण हईं राजेन्द्र के सारण हईं जेपी के आंदोलन हईं गांधी के चम्पारण हम राजनीति के धूरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं कुंवर सिंह के हूंकार हईं ! मंगल पांडे के यलगार हईं अब्दुल हमीद के कुर्बानी हईं हरदम उफनत जवानी हम देशप्रेम से परिपूरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं अंजन-प्रदीप के गीत हईं चित्रगुप्त के संगीत हईं बिस्मिल्लाह के तान हईं महेंद्र के पूर्वी गान हम रंगमंच के भिखारी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं बनारस के घाट हईं सोनपुर के हाट हईं गंगा-सरयू के पाट हईं राष्ट्र के उन्नत ललाट हम मस्त ठाट फकीरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं सोहर झूमर खेलवना हईं बोली भाखा के गहना हईं होरी चइता आ कजरी हम आरा छपरा मिर्जापुरी हईं ठेठबिहारी के माई भोजपुरी हईं हंऽ हम भाषा भोजपुरी हईं राम प्रकाश तिवारी "ठेठबिहारी" ग्राम पोस्ट: भटकेसरी जिला: छपरा