रात कईसे कटल नइखे कुछऊ पता
रात कईसे कटल नइखे कुछऊ पता पियनी अँखिया से केतना पता ना चलल भोरे पसरल किरिनिया कपारे चढ़ल केतना मस्ती भइल बा पता ना चलल। । के सम्हारी समझ के परे जिन्दगी केहू हँथवा पकड़ ले करीं बंदगी रात नैना से केतना बहल नीर बा मन दहाईल बा कहँवा पता ना चलल।। तोहार पैमाना का बा दिल तूरे खातिर काहें भइलु तू निरमोही जुलुमी शातिर आँख से आँख जबसे मिलल बा प्रिये खुद हेरा गइनी कब से पता ना चलल। । ठेठ हमरा के लोगवा बिहारी कहे हमरा दिलवा के कोना भोजपुरी रहे माई तोहरे चरनिया में चहकत बढ़ल कब दो हो गइनी ओजगर पता ना चलल रामप्रकाश तिवारी