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गोधन आ रेंगनी के कांट

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गोधन आ रेंगनी के कांट गोधन के प्रतिकृती रेंगनी के कांट काल्ह दियरी   रहे आ सभ केहु बहुते जोर-शोर आ खुशी से इ त्यौहार मनावल। आज अब गांव घर में माई बहिनी गोधन पारी लोग ओही जा घर के मर्दाना लोग के डिप्टी लागी रेंगनी के कांट खोजे के, काहे कि आपन-आपन भाई-भतिजा के सरपला के बाद मेहरारु आ लइकी सभ एही रेंगनी के कांट अपना जीभ पर गड़ावेला लोग आ अपना के दंड देवेला लोग। हम जानत बानी की रउआ सभे इहे सोंचत होखेब की हम इ भोरे-भोरे का लेके बईठ गईनी, त साहेब इ बात हम ऐसे कह रहल बानी कि दियरी आ गोधन के बाद चार दिन चले वाला प्रकृति पूजा के सबसे बड़हन परब छठ शुरू हो जाला। जहां दियरी के तइयारी में हमनी अपना घर-दुवार के साफ-सुथरा करिले सन आ घर के कचरा कबाड़ निकाल के बहरी फेंकी ले जा, बाकिर नदी-नाहर आ पोखरा के घाटन के साफा कइल भूला जाईले जा, एही के ध्यान में राख के हमनी के पुरखा-पुरनिया लोग गोधन में रेंगनी के कांट के उपयोगिता के शुरुवात कईल लोग। रेंगनी के कांट के विशेषता ह s की इ साफ-सुथर जगहा पर ना होखे ला, इ हरमेशा गंदा गोबर-गोथार आ काई-किच आला जगहा होला। जब हमनी एकरा के खोजत गांव...

आईल बसंत

आईल बसंत जब से चढल बसंत मन में खुशी भईल अपार बितल पतझड़ आईल बहार कि छछनत जिया के मिली अब करार कहीं लता-पता लपिटाए तरुवर से, जईसे नदी मिले सागर से।। त देखी के ई मिलन भरि लोरवा दुनु नयन कहीं मनमें गोरी करे विचार असहीं होई पिया से कबो मिलनवा हमार, बारह बरिस से पिया रहले बहरा ना जाने कहीया भेंटब हमरा कब उ शुभ दिन आई, पिया के बोलिया सुनाई बड़ा रे जुलुमी रउओ ठेठबिहारी कईसे हम तोहे मन के पीर समुझाईं की अब त घरवा आंई ए बलम हमहूं रऊवा संगवा फगुआ मनांई।।

यूपी को ये साथ पसंद है।

यूपी को ये साथ पसंद है।  हां यूपी को ये साथ पसंद है, क्योंकि नौटंकी में इसका कोई सानी नहीं है। हां यूपी को ये साथ पसंद है, क्योंकि पप्पू और बबूआ सा नादान कहीं और नहीं है हां यूपी को ये साथ पसंद है, क्योंकि चोरी-चकारी सीनाजोरी में  बहन-बेटीयों की इज्जत की रखवारी ही इनसे जरूरी है हां यूपी को ये साथ पसंद है, फटा कुर्ता और पंचर साईकिल वाले  जोकर इनसा कोई और नहीं है हाथ का साथ गरीबों की जेब साफ और भाई-भतिजों के सारे गुनाह माफ  इनसा परिवारवाद व भाई-भतिजावाद कहीं और नहीं है। हां यूपी को ये साथ पसंद है, कुर्सी को बचाने में सब कुछ झोंकना  लोभ-प्रलोभन, और तुष्टिकरन करने वाला इनसा कोई और नहीं है  इसिलये यूपी को ये साथ पसंद है  भाई हमको तो नमो की चाय पसंद है थोडी कड़वी थोड़ी मीठी चाय है प्रदेश को बचाने और आगे बढाने को  अब सब एक राय हैं गुंडाराज भ्रष्टाचार और भाई-भतिजावाद की सरकार हटाना है।  हां यूपी को ये साथ पसंद है, क्योंकि इस को लखनऊ नहीं  मुम्बई ही भेजना है तो कहे ठेठबिहारी अब की है  भाजपा की बारी मोदी और शाह की जोड़ी पसंद है