किस्सा कुर्सी के अरे बड़ा रे अजब हटे इ किस्सा कुर्सी केजे सुनल उहो पछतावे जे न सुने उहो मछियाये। आरे इ किस्सा सुनी के बहुते आपन भाग राजनीती में परिख्लेकेहू के मिलल कुर्सी त केहू लिहले मुहे माटी आजे के न हटे इ बात हटे बहुते पुरानकुर्सी खातिर माई बेटा के भेजली बनवा में आ कुर्सिये खातिर लडले कौरव पांडव कुरुक्षेत्र के मैदान में आ कुर्सिये खातिर भइल देशवा में अंग्रेजन संगे मार. इ कुर्सी के महिमा बा बहुते महान त कहस कवी ठेठ बिहारीकी भईया पडीय न कबो कुर्सी के फेरा में हो कुर्सी के फेरा में.
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दोस्त आ ओकर मतलब
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हमरा खातिर दोस्त के मतलब हम दोस्ती करे के बेर इ सोचले भी न रहनी की... ख़ुशी भी दोस्त से होखी आ गम भी दोस्त से होखी तकरार भी दोस्त से होखी आ प्यार भी दोस्त से होखी खिसिइबो करेब दोस्त से आ मनबो करेब दोस्त से ओरहनो दोस्त से होखी आ मिशालो दोस्त के होखी सबेरो दोस्त से होखी आ सांझी भी दोस्त से होई जिनगी के शुरुवातो दोस्त से होई आ जिनगी में मुलाकातो दोस्त से होई मोहब्बत भी दोस्त से बा आ इनायतों दोस्त से ह कामो दोस्त से ह आ नामो दोस्त से ह ख्यालो दोस्त के ह आ अरमानो दोस्त से ह ख्वाबो दोस्त से ह आ सांचो दोस्त से ह महफिलो दोस्त से ह आ माहौल भी दोस्त से ह मुलाकातो दोस्त से ह आ बिछोह भी दोस्त से ह जिनगी में बिरानी भी दोस्त से ह आ जिनगी में हरियरी भी दोस्त से ह चाहे इ कहलs इयार की आपन त दुनिए दोस्त से ह
जिंदगी का सार
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"सब ख़ुशी बा लोगन के अंचरा मे, बाकिर एगो हंसी खातिर वक़्त नइखे। दिन रात दउरेले दुनिया मे बाकिर, ज़िन्दगी बदे वक़्त नइखे , माई के लोरी के अहसास त हवे लेकिन , माई के माई कहे के फुर्सत नइखे सभ रिश्ता-नाता के त हमनी मार दिहले बानी जा, अब उनहन के माटीयो देवे के भी सवांस केकरा बा। सभ नाम त मोबाइल मे भरल ह बाकिर दोस्ती खातिर वक़्त कहाँ बावे। हम दोसरा के का बात करीं , जब अपने खातिर सवांस नइखे अंखिया त भरल बा जे अन्घी(नींद) से भारी, बाकिर सुते के बेरा कहंवा बा । दिलवा बा दरदिया से भरल बाकिर, रोवे के फुर्सत कहंवा बा? पैसा के दौर में दौरत बानी अइसन...कि की थाके के फुर्सत कहाँ दोसरा के एह्सासन के का मोल करीं हम , जब अपने सपन्वन खातिर ही सवांस नइखे अपने बताव ऐ जिनगी, एह जिनगी के का होखी की, हर दम मुवे वालन के त जिए के भी सवांस नइखे......" आ अंत में जिनगी के हमार एगो नजरिया एह आखिरी चार लाइनन में, "कि मुश्किलन से भागल आसान होला, हर पल जिनगी के इम्तिहान होला, डेराये वाला के मिलल न कुछो जिनगी में, आ लड़े वाला के त कदम में जहान होला, त कहस कवी ठेठ बिहारी कि बा आजु के जिंदगी के इहे फलसफा, ...
खुलल पोल
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खुल गइल पोल खुल गइल पोल अरे सब सरकारी दावा के, खुल गइल पोल, देश के मुखिया लोग के कगला के देर ना भइल की थोडके देर में भइल धमाकन से फेरू खुल गइल पोल एक ओर प्रधानमंत्री कहस कि सुरक्षा व्यवस्था बाटे देश के चाक-चौबंद। त तुरतले होला धमाका पांचसात गो धमाकन से सरकार के खुलेला पोल अइसे जइसे फाटेला कौनो ढोल़क के खोल तएतने पर कहस कवि ठेठ बिहारी कि खुल गइल पोल
पाकिस्तान नाहीं बदली
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सुरुज उगीए पश्चिम से गंगा बहीए उल्टा सब केहु बदली बाकीर, पाकिस्तान नाहीं बदली कतनो पियइब सांप के तु दुध उ काटल नाही छोंडीए काहे की पाकिस्तान नाही बदली दोसरा के चीज़ के आपन कहल ना ही छोड़ी घर में मऊगा लेखान घुस के बम धमाका कइला के आपन बहादुरी के शान में जोड़ल नही भुली पाकिस्तान नाहीं बदली मासुम आ निर्दोषन के मौत के घाट उतरला के पड़ोसीयन के पीठ में छुरा मरला के जेहाद कहल नाही भुली पाकिस्तान नाहीं बदली कबो कश्मीर त कबो पंजाब में कबो बनारस आ गुजरात में कहीयो बंगलोरु में त कहीयो अहमदाबाद में जयपुर आ अब दिल्ली धमाका कइल ना भुली पाकिस्तान नाहीं बदली देखे के बात तइ होई की हमनीं के धिरज के इ कहीया ले परीक्षा ली, कहीया भारत के नेता लोगन के आंख खुली जे उ पाकिस्तान से ओकरा गलती के बदला ली चाहे कुछो हो जाइ, पाकिस्तान नाहीं बदली धरती आपन गति बदली, चंद्रमा रात के बदला दिन में निकसी बाकिर पाकिस्तान नाहीं बदली पाकिस्तान नाहीं बदली जब-जब भारत के एगो छोटको लइका दहारी पाकिस्तान के लागी उ बाघ के बोली , तबे त कही ले हम की पाकिस्तान नाहीं बदली
हिन्दी दिवस
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आज हिन्दी दिवस बा त हमु सोचनीं की चल तनीं एकरो सेवा क लीहल जाओ। त लिख दीहनी एगो निहोरा सभके लगे । दिवस ह आज , आई मिलके मनावल जाओ एकरा के आज लिहल जाओ संकल्प की कर ल जाई , सब काम हिन्दी में आज से जे अगर करे के चाहेम हिन्दी के सेवा त हमरा इ निवेदन के मानेम करी ले निहोरा हाथ जोड़ी के की मान लिहल जाओ लइका के बात आज कहलन गाँधी नेहरू आ सब पुरखा पुरनिया जेके आपन मातृभाषा त काहे लजा ता नवका पीढ़ी बोले में एकरा के आज ऐही से लिहल जाओ संकल्प मन में आज की करेम सन हिन्दी के पूरा सम्मान आज से, खाली साल में एक पखवाडा आ चाहे एक सप्ताह हिन्दी- हिन्दी कइला से आ चाहे जय हिन्दी बोलला से ना हो सकेला हिन्दी के विकास, लगावे हिन्दी अपना लइकन से एगो आस आज,कि करीहन उ सब ओकरो पुरा सम्मान आज जय भारत बोल सब मिल क आज काहे की हिन्दी दिवस ह आज जय जय बिहार जय जय हिन्दी । राम प्रकाश तिवारी