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हिट्स ऑफ बलेसर

सुनीं आ सभका प्रिय बलेसर के याद ताजा रखीं। भोजपुरी के महान गायक के हमार श्रद्धांजली। राम प्रकाश तिवारी

आईल बैरी फगुनवा

जब से चढल बा जवानी, हो कि जब से चढल बा जवानी रानी भईली  दिवानी। दिन-रात मांगस खाली पिये के  पानी  सोचहीं में बीते उनकर जिंद़गानी, करीं कवन जतनवा, मान जईते जे मोर खिसियाईल सजनवा,  लिहीं कवना जादो-टोनवा के सहारा  की आ जईते घरवा  हमरो ठेठ बिहारी बलमऊवा, रहत भईले जेकरा सालभर बहरवा,  कहीं बीत न जाओ ईहो रे फगुनवा ईहे सोंच के छुटेला रानी के माथे पसेनवा कि जब से चढल बा जवानी, रानी भईली दिवानी।। चढते फगुनवा लागे जरे विरह अग्नि में तनवा की अईले  नाहीं मोरो रे बलमुआ,  की मन मोरा लागे बउराए हो राम करा द संईया से मिलनवा कि जब से चढल बा जवानी, रानी भईली दिवानी।। नाहीं अईले सजनवां त लागे काहे आईल बैरी फगुनवा
प्रेम के बाती चाहीले तोहरा के दिल के गहराई से, ई बात पुरान ह, चांद-सितारा तुरीं आ चाहे सुरुज के मधीम करीं ई ना हमार जबान ह, अरे प्यार के एह महिना मेंं फागुन के रंग में रंगा के केहु के दिल जोडीं ना त तुरे के भी काम हम ना करीं. तु चाहत हउ हमार,एगो इबादत हउ हमार , तोहसे रहके दूर जियत बानी कईसे हाल-ए-दिल सह रहल बानी कईसे हम ई बयां करीं की आज नईखे अल्फ़ाज़ हमरा पिटारा में करेजा में रहके भी नजरीया से दुर भईलु ए गोरीया काहे ना विरहीया में जरत ई जियरा खातिर बन जात तु अमृता। जीत के भी दुनिया सगरी जाले ठेठ बिहारी अपना जियरा से हारी

गुरु का ऋण

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आदरणीय पाठकगण, सादर प्रणाम एक बार फिर से हाजिर हुं आपकी सेवा में अपनी रचना को लेकर  " गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णु गुरु देव महेश्वर  ।  गुरु साक्षात् परब्रह्म, तैस्मय: श्री गुरुवे नमः"।। कैसे करु मैं शुक्रिय़ा अदा आपका  नहीं हैं अल्फ़ाज आज मेरे  पास  बन पाया हुं जो कुछ भी मैं आज है सम्भव हुआ कृपा से आपकी क्योंकि- मैं तो था निराकार मिट्टी का माधो, मुझको दिया आपने रुप आकार देके मुझे ज्ञान रुपी अपना प्यार, ठीक वैसे ही-  जैसे बनाता मिट्टी का बर्तन कोई कुम्हार कर के जतन लाख हजार।  ज्यों तपकर ही  सोने में आती है लालिमा, वैसे ही परिक्षा में अपनी तपाकर किया, आपने मुझे तैयार,ताकी कर  सकुं  मैं भविष्य की दुश्वारियों का सामना।। जो न ऐंठा होता आपने मेरा कान तो भला कैसे सुनता आज जग मेरा गान कैसे उतार पाऊंगा मैं आपका वो ऋण जो  दिया आपने मुझे ज्ञान के रुप में चाहे  लेके जन्म हजार  करुं मैं समस्त जीवन बलिदान। लेकिन तब भी देखिये मेरी ये धृष्टता आज भी  हुं   मार आपसे खाना चाहता क्योकि अनुसाशन क...

अब का करबs राज ठाकरे...............

अब का करबs राज ठाकरे, बतावs अब का करबs, काहे नईखे मुंहवा से बकार निकलत अब जब कई दिहले तहार बेइज्ज़ती उहे लोगवा जिनकर करे चलल रहल तु सम्मान हो कि अब का करबs राज ठाकरे।। काहे ना निकलल तोहरा मुंह से आशा जी खातिर कवनो फरमान कह दिहली जब उ खुल्लम खुल्ला ना आवे हमरा मराठी जब क्रिकेट के देवता सचिन करि दिहले आपन रेकॉड डबल सेंचुरी के हिन्दुस्तान के नांवे बोलs अब का करबs राज ठाकरे ।। हो काहे नईखs देत निकाल एहु लोग के मुम्बई से बहरिया कहंवा गइले तहार पोसुवा गुंडा जे करेलन निर्दोषन पर अत्याचार हो कि अब का करबs राज ठाकरे ।। हम बताव तानी तोहरा के रस्ता एक निमन सुनलिहs लगा के ठीक से कनवा आपन उठाव आपन बोरिया बिस्तर गंदा राजनिति के जाके लेले संन्यास तुहु कवनो नदी के किनारे मानs बतिया ठेठ बिहारी के, हो काहे कि अब नांही लोगवा तहरा फेरा मे पडीहें काहे से कि बुझ गइले तोहार खेलवा उहो सब सज्जन श्रीमन त बोलs अब का करबs राज ठाकरे।। हो बोलs बोलs अब का करबs राज ठाकरे त बोलs अब का करबs राज ठाकरे...............

भोजपुरी शायरी-3

आदरणीय भोजपुरीया भाई बहिन लोग के सादर नम्स्कार। हम राम प्रकाश तिवारी "ठेठ बिहारी" एक बेर फेरु रउवा लोग के सोझा पेश कर रहल बानी आपन कुछ नया रचना आशा बा कि ऱउवा लोग के पसंद आई। एक बात आउरो बा कि हम जानत बानी की हमरा शायरी करे ना आवेला बाकिर हमरा लिखे के मन करेला त लिख दिहीले।। आशा बा कि रउवा लोग एह शायरीयन के भी जरुर पढेब आ हमरा के आपन कमेंट देब।। त प्रस्तुत बा भोजपुरी शायरी-3।। 8. कहंवा से अइलु गोरिया, कहंवा के जइबु, आहे बताव गोरिया काहे तरसावेलु तु ठेठ बिहारी के कइ के सोरहो श्रृगांर हो कि जब देखइबु नांही, की पियइबु नाहीं प्यार के रसवा।। 9.हाथे लिहले फुलवा गुलाब के करीं हम विचार, कि ना जाने कहंवा बाडी सजनीया हमार, कब होई रामा मिलनवा के जोग हो कि रहीया निहारे आपन सजनी के रातु दिन बईठी के ठेठ बिहारी हो।। 10. जात रहीं हम एक दिन बजार, मिल गईली रस्ता में उ त ईयार नैना से नैना मिली के भईले चार, कि होई रे गईले ठेठ बिहारी के उनुकरे से पहिली नजरीया में प्यार,।।

भोजपुरी शायरी-2

5.  हम ना जनले रहनी कि प्यार में का होला,     जिनगी से बढके जेकरा के चाहल जाला     उ केहु आऊरे के दिवाना निकलेला,     त जान के भी जिनगी के जे जुआ खेलेला     ओकरे के पक्का आशिक ई ठेठ बिहारी बुझेला। 6. दु डेग तु बढावs दु डेग हम बढाहीं,     दुगो मिठ बचनवा तु कह, दुगो हम कहीं,    नैना से नैना के मिला के, हियरा से हियरा के जोड    तन में बसालs ठेठ बिहारी के प्राण नियर,   तब देखअ दुनिया के प्यार के नज़रिया से   ई कइसन तोहरा सोहाई........... 7. जब से चढल फगुनवा, तन में लागे आगी     आ मन करे सजनीया के लगे जांईं भागी,     बाकिर ठेठ बिहारी अइसन कहां हमरी भाग     कि लेके राखीं प्रेयसी के दिनु-राती अपना लागी।।