प्रेम के बाती
चाहीले तोहरा के दिल के गहराई से,
ई बात पुरान ह,
चांद-सितारा तुरीं आ
चाहे सुरुज के मधीम करीं
ई ना हमार जबान ह,
अरे प्यार के एह महिना मेंं
फागुन के रंग में रंगा के
केहु के दिल जोडीं ना त तुरे
के भी काम हम ना करीं.
तु चाहत हउ हमार,एगो
इबादत हउ हमार ,
तोहसे रहके दूर
जियत बानी कईसे
हाल-ए-दिल सह रहल बानी
कईसे हम ई बयां करीं की आज
नईखे अल्फ़ाज़ हमरा पिटारा में
करेजा में रहके भी नजरीया से
दुर भईलु ए गोरीया
काहे ना विरहीया में जरत
ई जियरा खातिर बन जात तु अमृता।
जीत के भी दुनिया सगरी
जाले ठेठ बिहारी अपना जियरा से हारी


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