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गुरु का ऋण

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आदरणीय पाठकगण, सादर प्रणाम एक बार फिर से हाजिर हुं आपकी सेवा में अपनी रचना को लेकर  " गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णु गुरु देव महेश्वर  ।  गुरु साक्षात् परब्रह्म, तैस्मय: श्री गुरुवे नमः"।। कैसे करु मैं शुक्रिय़ा अदा आपका  नहीं हैं अल्फ़ाज आज मेरे  पास  बन पाया हुं जो कुछ भी मैं आज है सम्भव हुआ कृपा से आपकी क्योंकि- मैं तो था निराकार मिट्टी का माधो, मुझको दिया आपने रुप आकार देके मुझे ज्ञान रुपी अपना प्यार, ठीक वैसे ही-  जैसे बनाता मिट्टी का बर्तन कोई कुम्हार कर के जतन लाख हजार।  ज्यों तपकर ही  सोने में आती है लालिमा, वैसे ही परिक्षा में अपनी तपाकर किया, आपने मुझे तैयार,ताकी कर  सकुं  मैं भविष्य की दुश्वारियों का सामना।। जो न ऐंठा होता आपने मेरा कान तो भला कैसे सुनता आज जग मेरा गान कैसे उतार पाऊंगा मैं आपका वो ऋण जो  दिया आपने मुझे ज्ञान के रुप में चाहे  लेके जन्म हजार  करुं मैं समस्त जीवन बलिदान। लेकिन तब भी देखिये मेरी ये धृष्टता आज भी  हुं   मार आपसे खाना चाहता क्योकि अनुसाशन क...

अब का करबs राज ठाकरे...............

अब का करबs राज ठाकरे, बतावs अब का करबs, काहे नईखे मुंहवा से बकार निकलत अब जब कई दिहले तहार बेइज्ज़ती उहे लोगवा जिनकर करे चलल रहल तु सम्मान हो कि अब का करबs राज ठाकरे।। काहे ना निकलल तोहरा मुंह से आशा जी खातिर कवनो फरमान कह दिहली जब उ खुल्लम खुल्ला ना आवे हमरा मराठी जब क्रिकेट के देवता सचिन करि दिहले आपन रेकॉड डबल सेंचुरी के हिन्दुस्तान के नांवे बोलs अब का करबs राज ठाकरे ।। हो काहे नईखs देत निकाल एहु लोग के मुम्बई से बहरिया कहंवा गइले तहार पोसुवा गुंडा जे करेलन निर्दोषन पर अत्याचार हो कि अब का करबs राज ठाकरे ।। हम बताव तानी तोहरा के रस्ता एक निमन सुनलिहs लगा के ठीक से कनवा आपन उठाव आपन बोरिया बिस्तर गंदा राजनिति के जाके लेले संन्यास तुहु कवनो नदी के किनारे मानs बतिया ठेठ बिहारी के, हो काहे कि अब नांही लोगवा तहरा फेरा मे पडीहें काहे से कि बुझ गइले तोहार खेलवा उहो सब सज्जन श्रीमन त बोलs अब का करबs राज ठाकरे।। हो बोलs बोलs अब का करबs राज ठाकरे त बोलs अब का करबs राज ठाकरे...............

भोजपुरी शायरी-3

आदरणीय भोजपुरीया भाई बहिन लोग के सादर नम्स्कार। हम राम प्रकाश तिवारी "ठेठ बिहारी" एक बेर फेरु रउवा लोग के सोझा पेश कर रहल बानी आपन कुछ नया रचना आशा बा कि ऱउवा लोग के पसंद आई। एक बात आउरो बा कि हम जानत बानी की हमरा शायरी करे ना आवेला बाकिर हमरा लिखे के मन करेला त लिख दिहीले।। आशा बा कि रउवा लोग एह शायरीयन के भी जरुर पढेब आ हमरा के आपन कमेंट देब।। त प्रस्तुत बा भोजपुरी शायरी-3।। 8. कहंवा से अइलु गोरिया, कहंवा के जइबु, आहे बताव गोरिया काहे तरसावेलु तु ठेठ बिहारी के कइ के सोरहो श्रृगांर हो कि जब देखइबु नांही, की पियइबु नाहीं प्यार के रसवा।। 9.हाथे लिहले फुलवा गुलाब के करीं हम विचार, कि ना जाने कहंवा बाडी सजनीया हमार, कब होई रामा मिलनवा के जोग हो कि रहीया निहारे आपन सजनी के रातु दिन बईठी के ठेठ बिहारी हो।। 10. जात रहीं हम एक दिन बजार, मिल गईली रस्ता में उ त ईयार नैना से नैना मिली के भईले चार, कि होई रे गईले ठेठ बिहारी के उनुकरे से पहिली नजरीया में प्यार,।।

भोजपुरी शायरी-2

5.  हम ना जनले रहनी कि प्यार में का होला,     जिनगी से बढके जेकरा के चाहल जाला     उ केहु आऊरे के दिवाना निकलेला,     त जान के भी जिनगी के जे जुआ खेलेला     ओकरे के पक्का आशिक ई ठेठ बिहारी बुझेला। 6. दु डेग तु बढावs दु डेग हम बढाहीं,     दुगो मिठ बचनवा तु कह, दुगो हम कहीं,    नैना से नैना के मिला के, हियरा से हियरा के जोड    तन में बसालs ठेठ बिहारी के प्राण नियर,   तब देखअ दुनिया के प्यार के नज़रिया से   ई कइसन तोहरा सोहाई........... 7. जब से चढल फगुनवा, तन में लागे आगी     आ मन करे सजनीया के लगे जांईं भागी,     बाकिर ठेठ बिहारी अइसन कहां हमरी भाग     कि लेके राखीं प्रेयसी के दिनु-राती अपना लागी।।        

भोजपुरी शायरी

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1. एगो जुग से ही चहले बानी तोहरा के,बड़ा ही मुश्किल से पवले बानी तोहरा के, कइसे बिसरीं हम तोहरा के, काहे से की जब चोरवले बानी ठेठ बिहारी किस्मत के चिचरीयन से तोहरा के।। 2.का हम कहीं तहरा बारे में, कि नईखे अल्फ़ाज़ हमरा पिटारा में। अरे कइसे बुझांई ठेठ बिहारी एह मनवा के कि, जब तईयारे नईखे इ समझे के, कि, बडाई त ओकर कइल जाला जे एकरा काबि़ल होला, अब ओकर का बडाई कईल जाओ जे खुदे बडाई के होखो।। 3. लिखीले रात भर हम शायरी तोहरा इस्तकबाल में, बना देले बा ज़माना हमरो के उस्ताद-ए- कउव्वाल महफ़िल में कि मज़ा ले ले के सुनता दुनिया हमरा मोहब्बत के तराना के बतावस ठेठ बिहारी अपना शायरी से दुनिया के सारी, की कईले बाड़न ई केकरा से ईयारी..........।। 4.बीतल माघ आई गइले फागुन बौरहवा, बाकीर अइली नाहीं पिया के प्यारी नइहर से ससुरवा, कि तडपस मनवा में सजनवा की बिती रे जंईहे इहो फगुनवा बे-रंगवा की कब होई ठेठ बिहारी से  मिलनवा हो राम।। फेर मुलाकात होइ अइसने कुछ आउरो शायरी के संगे तब तकले प्रणाम।।।।।।।।।।

माघ महिना के महिमा

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माघ  महिना  के  महिमा बीतते  पूष  महिना  आवे  माघ  के  महीनवा आवे  माघ  के  दिनवा  की हो  कंपकंपी  छोड़ावे  सबकर निकले के ना मन  करे ओढना में से की निक लगे गरम रजाई मन करे बईठल  रहीं दिन भर लुका  के इया नानी संगे राजयिया  में  बोरसी  का  लगे जे  कहे  केहू  कुछो करे के काम त मन में लगे बाउर एतना की काहे कहलस इ हमरा के करे के काम एह  जाड़ा पाला में मन करे की पुछ दीहीं तपाक से की लउकत नइखे तोहरा हो पडत बाटे कतना पाला  संगे ले के कोहरा हो की बुझात नइखे, तोहरा बाटे  कतना  जाड़ा अइसने त महान हउवें माघ महिना की कमकरतो के बनादेस इ त...

भोजपुरी गीतन के विजेट