माघ महिना के महिमा

माघ  महिना  के  महिमा
बीतते  पूष  महिना  आवे  माघ  के  महीनवा
आवे  माघ  के  दिनवा  की हो  कंपकंपी  छोड़ावे  सबकर
निकले के ना मन  करे ओढना में से
की निक लगे गरम रजाई
मन करे बईठल  रहीं दिन भर लुका  के इया नानी संगे
राजयिया  में  बोरसी  का  लगे
जे  कहे  केहू  कुछो करे के काम
त मन में लगे बाउर एतना की काहे
कहलस इ हमरा के करे के काम एह  जाड़ा पाला में
मन करे की पुछ दीहीं तपाक से की
लउकत नइखे तोहरा हो
पडत बाटे कतना पाला  संगे ले के कोहरा हो
की बुझात नइखे, तोहरा बाटे  कतना  जाड़ा
अइसने त महान हउवें माघ महिना
की कमकरतो के बनादेस
इ त परलाया, त परलाया के कवन बा बात
त एही पर कहस कवी ठेठ बिहारी की
तनी  देख भईया  ओहू किसान  लोगवा  के
जे करस खेतवा के रखवारी सारी रतिया
तनी  देख भईया  ओहू घरमें के घरनी लोगवा  के
जे करस कुटनी-पिसानिया घरवा में उठी के अधरतिया
आ उनहू के देखा जे बांचे रामायण भोरहयीं से ओसरवा में
त भईया माघ महाराज के बोला सब मिली जयकार आ
करा अपना भीतरी तनी फुर्ती के संचार
लागजा तुभी अपना काम धंधा में
मत बनअ तुहू बुढवा एह ठंढा में. --~~~~

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