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जय भोले शंकर

जय भोले शंकर चढ़ते सावन लागे मनवा झुमे जईसे झुमे बन में कवनो मोर चल रे मन भोले के नगरीया  चढावल जाई गंगा जी के पनीया भरी भरी गगरीया हो,बाबा के कपरीया पान फुल भोला के निक ना लागे मानस भोला खाई के गोला भंगीया पेड़ा मिठाई शिवजी के मनही ना भावे होले खुस बाबा जब चढे धतुर-अकवनीया चल रे मन बाबा के नगरीया त्रिशुलवे पर बा बाटे बसल काशी नगरीया हो खुल जाले जहंवा सभ पाप के गठरीया चल चल रे मन ओही बाबा के नगरीया कहे अपना मनवा के बतीया त कर जोड़ी पईयां परी करी ले विनितीया सुनलीहीं बाबा ठेठबिहारी के हो अरजीया सुख शांति होखे चंहु ओरिया दुनिया में बजावे डंका राउर सभ भोजपुरीया दिहीं ए बाबा अबकी इहे असीसीया

जिअs जिअs ऐ जवान

अब राम जी रहेलन पलानी में , जीय-जीय हो जवान , बनी पलंग के पहलवान , आग लागो तोहरी अइसन जवानी में।। दिन भर दारु-ताडी पियस , सांझी के जा के लुकास चुहानी में , जीय-जीय हो जवान , आग लागो तोहरी अइसन जवानी में।। कहीं माई-बाप पुकारे , कहीं बहिनी करे पुकार बाकिर मेहरी आगे सुनाय ना तोहरा केहु के बानी , ना जाने कहीया जागी तोहरो जवानी कह कब ले रखब s आपन , तलवार लुका के मयानी में जीय-जीय हो जवान , आग लागो तोहरी अइसन जवानी में।। अपने त रहेल s महल-अटारी में काहे रखले बाड़ s राम जी के अबले पलानी में, कर के देशवा खातिर कुछ बलिदान लिखवाल s तुंहु आपन नाम अमर कहानी में जीय-जीय हो जवान , आग लागो तोहरी अइसन जवानी में।। कहस ठेठबिहारी बीर रस सुने के  तरसे कान सभकर, आ  तु  काहे फंसी गईल बाड़s तिरिया के बानी में , जीय-जीय हो जवान , आग लागो तोहरी अइसन जवानी में।।