सावन लागे सोहावन
जब से चढल बा सावन सोहावन लागे इ हमरा,
बाकी का कहीं हम भइल का हमार हाल कि
जब से गइले पिया परदेस,
हो तब से ही भइल बुरा हाल हमार,
पडे जब बुनी के फुहार,
हो पडे जब बुनी के फुहार,
लागे तन बदन में अगिया हमरा
मन में बाज उठे विरहा के तार
लागे केहु कइसहुं मिलवा दे पियवा हमार
जीनगी भर पुजेब चरनीया ओकर,
जे करा दीही पिया से मिलनवा हमार
हो सखी का कहीं हम तहरा से
कइसे कटे रतीया हमार,
बीते रतीया बदलते करवटीया खटीया पर
पिया जी के इन्तजार में तरसे नैनाहमार हो
बाकी उ निर्मोहीया ना अइले
छोडी के सहरीया के नोकरीया
की बीते लागल सावन के महीनवा सोहावन
अइसहीं करत रहनी मनवा में विचार,
बइठी के अंगनवा में भोरे भिनुसरवा
की कहींसे आइल एगो काग करीया,
बईठ के बोले लागल छनीया,
त मन में जागल एगो आस की,
अइहें अब पियवा हमार,
अतने में सुननी रे हम पिया जी के बोलिया बहरा
लागल हमरा अचकामें एगो झटका
की कहीं मार मनवा त नाहीं बउराए लागल
सोचते रहनी अपना मनवा में इहे तबले देकनी की संइया मोरो
हो कीराजा मोर आइगले बहरा से घरवा
की लागे अब सावन सोहावन हमरा
त अइला से "ठेठबिहारी" जी के घरवा
हमु खेलब अब सईंया से झिझरी बहरीया।
बाकी का कहीं हम भइल का हमार हाल कि
जब से गइले पिया परदेस,
हो तब से ही भइल बुरा हाल हमार,
पडे जब बुनी के फुहार,
हो पडे जब बुनी के फुहार,
लागे तन बदन में अगिया हमरा
मन में बाज उठे विरहा के तार
लागे केहु कइसहुं मिलवा दे पियवा हमार
जीनगी भर पुजेब चरनीया ओकर,
जे करा दीही पिया से मिलनवा हमार
हो सखी का कहीं हम तहरा से
कइसे कटे रतीया हमार,
बीते रतीया बदलते करवटीया खटीया पर
पिया जी के इन्तजार में तरसे नैनाहमार हो
बाकी उ निर्मोहीया ना अइले
छोडी के सहरीया के नोकरीया
की बीते लागल सावन के महीनवा सोहावन
अइसहीं करत रहनी मनवा में विचार,
बइठी के अंगनवा में भोरे भिनुसरवा
की कहींसे आइल एगो काग करीया,
बईठ के बोले लागल छनीया,
त मन में जागल एगो आस की,
अइहें अब पियवा हमार,
अतने में सुननी रे हम पिया जी के बोलिया बहरा
लागल हमरा अचकामें एगो झटका
की कहीं मार मनवा त नाहीं बउराए लागल
सोचते रहनी अपना मनवा में इहे तबले देकनी की संइया मोरो
हो कीराजा मोर आइगले बहरा से घरवा
की लागे अब सावन सोहावन हमरा
त अइला से "ठेठबिहारी" जी के घरवा
हमु खेलब अब सईंया से झिझरी बहरीया।
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