रात के पहरा

सावन के महीना रहे,
अन्हरीया रात के पहरा रहे।
सुतल रहनीं हम,ओ सुतल रहनीं हम भीतरीया आला घरवा में,
तले देखनी एगो सपना बडा विचित्र रे,
ए सखी हम तोह से का बतांई,
का का सपनवां में।
पिया के हम के इयाद आइल,
लागल कि करेजवा केहु हिला गइल।
ओह रात के पहरा में।।
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